अधिकारियों-कर्मचारियों का जीपीएफ-ईपीएफ निगल रहे नगरीय निकाय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकाय क्या अपने ही अधिकारियों-कर्मचारियों की जीपीएफ-ईपीएफ की राशि निगल रहे हैं? यह सवाल इसलिए कि सरकार की जानकारी में यह बात आई है कि कई नगरीय निकायों अधिकारियों-कर्मचारियों की जीपीएफ-ईपीएफ की राशि निरंतर जमा नहीं की जा रही। इस पूरे मामले को सरकार ने अत्यंत गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने का आदेश जारी किया है।

कई निकाय जमा नहीं कर रहे राशि नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संयुक्त संचालक ने इस संबंध में प्रदेश के सभी संयुक्त संचालकों रायपुर, दुर्ग, जगदलपुर, बिलासपुर व अंबिकापुर को पत्र जारी कर कहा है कि शासन के संज्ञान में यह बात आई है कि नगरीय निकायों द्वारा अधिकारियों-कर्मचारियों की जीपीएफ-ईपीएफ की राशि निरंतर जमा नहीं की जा रही है। इस राशि का अविलंब भुगतान प्राथमिकता के आधार पर समस्त नगरीय निकायों द्वारा जिम्मेदारीपूर्वक किया जाना है।

नगरीय प्रशासन विभाग ने ये भी कहा है कि इस पूरे मामले की सूक्ष्म जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित कर निकायों से प्राप्त जानकारी का समुचित परीक्षण कराकर ही संचालनालय को भेजें।

अनुदान व ऋण की राशि से न हो भुगतान संयुक्त संचालक ने खासतौर पर कहा है कि पूर्व में शासन से अनुदान के रूप में दी गई ऋण राशि से वेतन जीपीएफ-ईपीएफ के भुगतान की राशि को समावेश नहीं किया जाए। इसका मतलब ये हो सकता है कि निकायों को ऋण से मिले धन का उपयोग इस काम में नहीं करना है। स्वयं के स्रोत से यह राशि अदा करनी है।

छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों की संख्या 169 है। इनमें 14 नगर निगम, 43 नगरपालिका तथा 112 नगर पंचायतें हैं।

इन सभी निकायों में काम करने वाले सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन से हर महीने जीपीएफ ‌एवं ईपीएफ में जमा करवाने के लिए राशि काटी जाती है। ये राशि जीपीएफ तथा ईपीएफ की राशि अंशदान के रूप में जमा की जाती है।

ऐसा किया जाना कानूनी रूप से भी बाध्यकारी है, क्योंकि इस राशि मे अधिकारियों-कर्मचारियों की भविष्य निधि तथा रिटायरमेंट के बाद पेंशन फंड के लिए भी राशि रखी जाती है। इस कोष का लाभ कर्मियों को आजीवन मिलता है।

यह परिपत्र इसलिए जारी किया गया है कि यह जानकारी मिले कि किन निकायों द्वाराजी जीपीएफ-ईपीएफरंतर जमा किया जा रहा है। किन निकायों में यह राशि नियमित रूप से नहीं जमा की जा रही है। यह राशि निरंतर जमा कराना निकायों का वैधानिक दायित्व है।

यह भी संभव है कि कुछ निकायों में कोरोनाकाल के दौरान राशि की वसूली में कमी आई, रिकवरी नहीं हुई हो, लेकिन जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी।

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