28.2 C
Chhattisgarh
Sunday, September 25, 2022

राष्ट्रपति भवन और वहां रहने वाले देश के प्रेसिडेंट पर बने इस ऐतिहासिक नाटक के बारे में जानिए रोचक बात

- Advertisement -spot_imgspot_img

नई दिल्ली: भारत के राष्ट्रपति भवन का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है. ब्रिटिश काल में भारत में नियुक्त वाइसराय के आवास के लिए निर्मित इस भवन को आजादी के बाद भारत के राष्ट्रपति के आवास के लिए किया जाता है. सैकड़ों एकड़ में फैले इस भवन में आजादी के बाद कई राष्ट्रपति रह चुके हैं, इन महान विभूतियों ने अपने हिसाब से इसमें समय समय पर परिवर्तन कराया जिससे वाइसराय के लिए बना ये भवन पूर्ण रूप से भारतीय स्वरूप में ढल चुका है. राष्ट्रपति भवन की ये यात्रा भारत की आजादी की लड़ाई से लेकर वर्तमान तक फैली हुई है.. इस दौरान कई उतार चढ़ाव आए देश और दुनिया में कई बड़ी घटनाएं हुईं इन सबका गवाह रहा है राष्टपति भवन.

इस यात्रा को समझाने के लिए एक नाट्य प्रस्तुति 16 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में हुई. ‘राष्ट्रपति भवन’ के नाम से बने इस नाटक का कुमार सोहानी ने डायरेक्ट किया है, जबकि मनोज जोशी इसके क्रियेटिव डायरेक्टर हैं, कास्टिंग संजय भाटिया ने की है. इस नाटक में भारत के प्रथम राष्ट्रपति से लेकर वर्तमान राष्ट्रपति तक का कार्यकाल व वायसराय हाउस कैसे राष्ट्रपति भवन बना इसको बहुत बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत किया गया है. इस नाटक में जानी मानी कलाकार प्रवीना देशपांडे ने पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का रोल किया है. प्रवीना रायपुर की रहने वाली हैं. जनधारा 24 से बात करते हुए प्रवीना ने कहा कि इस ऐतिहासिक नाटक का हिस्सा बनना और उसे राष्ट्रपति भवन में इतने विशिष्ट लोगों के सामने पेश करना उनके लिए गौरव का पल था.

इस नाटक को देखने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू, कई राज्यों के राज्यपाल और कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। ये इस नाटक की पहली प्रस्तुति है.

राष्ट्रपति भवन का इतिहास –

राष्ट्रपति भवन वास्तुकारिता की असाधारण कल्पनाशील और दक्ष वास्तुकार सर एडविन लुट्येन्स की कृति थी। सर लुट्येन्स ने ही इस अंग्रेजी के एच आकार वाले भवन की संकल्पना की थी जो 330 एकड़ संपदा पर पांच एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस भवन की कुल चार मंजिलों पर 340 कमरे हैं।

हजारों श्रमिकों के श्रमसाध्य प्रयासों से ये भवन का निर्माण वर्ष 1929 में पूरा किया गया। भारत के वायसराय के आवास के रूप में मूल रूप से निर्मित, राष्ट्रपति भवन में इसके नाम, निवास और प्रयोजन के मामले में अनेक परिवर्तन किए गए हैं। भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति, श्री आर. वेंकटरमण ने ठीक ही कहा है, ‘प्रकृति और मनुष्य, चट्टान और वास्तुकला को जितने शानदार ढंग से राष्ट्रपति भवन की उत्कृष्ट बनावट में सम्मिश्रित किया गया है उतना शायद किसी और कार्य में नहीं किया गया है।’

जब इसे निर्मित किया गया तो इसे वायसराय का आवास कहा गया। 15 अगस्त 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ तो इस भवन को सरकारी आवास में परिवर्तित कर दिया गया। अंतत: राष्ट्रपति, डॉ. राजेंद्र प्रसाद के कार्यकाल के दौरान इस भवन का नाम राष्ट्रपति भवन कर दिया गया।

Latest news
Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here