28.2 C
Chhattisgarh
Sunday, September 25, 2022

Where is the crocodile Temple in Chhattisgarh :  कौन था गंगाराम…. जानें

- Advertisement -spot_imgspot_img

 

जनधारा 24 न्यूज डेस्क । Where is the crocodile Temple in Chhattisgarh ? कौन है बेमेतरा जिले के बावा मोहतारा का गंगाराम ?

Where is the crocodile Temple in Chhattisgarh .

कहाँ बनाया गया है मगरमच्छ गंगाराम का मंदिर ?

ग्रामीणों ने क्यों बनाया गंगाराम का मंदिर ?

कितने सालों तक जिया गंगाराम ?

वहां के ग्रामीण आज भी क्यों गंगाराम को याद करते हैं ?

गंगाराम की कौन सी खासियतें थीं वहां के ग्रामीणों को पसंद ?

सब कुछ आपको बताएंगे बस आप बने रहिए जनधारा 24 के साथ-

who was Gangaram

Where is the crocodile monument built in Chhattisgarh
Where is the crocodile monument built in Chhattisgarh

दरअसल गंगाराम एक बूढ़े मगरमच्छ का नाम था।

उसकी मौत 130 साल की उम्र में वर्ष 2019 में हो गई।

वह छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बावा मोहतारा गांव में रहा करता था।

जिस तालाब में गंगाराम रहता था, वहां और भी मगरमच्छ हैं,

जो ग्रामीणों के साथ बिल्कुल पालतू जानवरों की तरह रहते हैं।

बड़ी तादाद में मगरमच्छ इधर-उधर देखने को मिल जाते हैं।

मगरमच्छों के पास गांव के बच्चे बिना भय के खेलते हुए आपको दिख जाएंगे।

मोहतरा के ही निवासी बसावन ने बताया कि

गंगाराम मगरमच्छ नहीं बल्कि वहां के लोगों का दोस्त था।

उसे गांव का हर व्यक्ति प्यार करता था।

What were the specialties of Gangaram

आमतौर पर मगरमच्छ एक बेहद हिंसक जानवर होता है।

हमारे यहां कहावत भी प्रचलित है कि जल में रहे मगर से बैर ?

कुल मिलाकर गंगाराम अपने व्यवहार से उस गांव के ही नहीं

वहां आने-जाने वालों का भी दिल जीत चुका था।

Read More : Government job Recruitment 2022: 12 वीं पास युवाओं के लिए सुनहरा अवसर , 1411 पदों पर निकली वैकेंसी, इस वेबसाइट पर जाकर कर सकते हैं आवेदन

उसकी खासियत ये थी कि वो तालाब में बच्चों के साथ आराम से तैरता था।

किसी को कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाता था।

गांव के लोग उसको अपने -अपने परिवार का सदस्य मानते थे।

पूरा गांव गंगाराम का अपना घर था।

वह कहीं भी बेखटके आता- जाता था।

 

What is the new name of Bawa Mohtara village

इस गांव में मगरमच्छों की तादाद ज्यादा होने के कारण इस गांव को मगरमच्छों वाला गांव कहा जाता है।

यहां आज भी गंगाराम के वंशज बेखटके ग्रामीणों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।

यहां के मगरमच्छ ग्रामीणों पर कभी भी हमला नहीं करते।

तो वहीं ग्रामीण भी लगातार इसी कोशिश में लगे रहते हैं कि

उनकी वजह से इन मगरमच्छों को कोई तकलीफ न होने पाए।

Where is the Temple of Gangaram ?

यह घटना साल 2019 की बताई जा रही है।

जब अचानक 130 साल के मगरमच्छ गंगाराम की मौत हो गई।

जैसे ही ये खबर गांव के लोगों को मालूम हुई हर कोई अपना कामधाम छोड़कर भागे-भागे उसी के पास आ पहुंचे।

बड़ी तादाद में तो लोग ऐसे रो रहे थे।

Read More : Dantewada/Sukma News:  मुठभेड़ में 5 लाख रुपए के हार्डकोर इनामी नक्सली ढेर, पुलिस ने शव किया बरामद

गोया ये कोई मगरमच्छ नहीं बल्कि उनके परिवार का कोई इंसान मर गया हो।

ग्रामीणों के रोने के पीछे एक ही कारण था कि

हर किसी की यादें किसी न किसी रूप में गंगाराम से जुड़ी हुई थीं।

हिंसक प्रजाति का ये प्राणी छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए इतना अहिंसक साबित होगा,

ये सोचकर भी आपको आश्चर्य हो रहा होगा।

गंगाराम की मौत के बाद बड़ी ही धूमधाम से उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई।

5 सौ से भी ज्यादा ग्रामीणों की मौजूदगी में

उसकी लाश को तालाब के किनारे ही एक जगह पर दफना दिया गया।

बाद में वहीं पर एक मंदिर बनाया गया।

Know where else such a village is in India

Where is the crocodile monument built in Chhattisgarh
Where is the crocodile monument built in Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा के अलावा भारत में दूसरी जगह गुजरात है।

जहां ऐसे मगरमच्छ पाए जाते हैं, जो इंसानों पर हमला नहीं करते।

गुजरात के चरोतार जिले में भी एक जगह ऐसी है

जहां इंसान और मगरमच्छ साथ -साथ रहते हैं।

यहां के ग्रामीणों पर भी तालाब में मौजूद मगरमच्छ कोई नुकसान नहीं पहुंचाते।

लोकल एनजीओ, वॉलंटरी नेचर कंजरवेंसी के सर्वे के

मुताबिक चरोतार के 30 गांवों में कम से कम 164 मगरमच्छ बताए जा रहे हैं।

एक ऐसा क्षेत्र जो प्रति वर्ग किमी 600 से अधिक लोगों को पैक करता है।

इन गांवों का लगभग हर तालाब मगरमच्छों से भरा हुआ है।

लोगों को अपनी ओर आता देखकर

ये मगरमच्छ अपने बच्चों को उठाकर पानी में चले जाते हैं,

दिन में वे यहीं पर धूप सेंकते हैं और घास पर भी रेंगते हैं।

वे ऐसी जगह पर भी रहते हैं जहां मवेशी चरते हैं और बच्चे खेलते हैं।

वे इन पर हमले नहीं करते हैं।

 

Villagers are going to dig a new pond

गांव में मगरमच्छों की बढ़ती तादाद को लेकर ग्रामीण अब नया तालाब बनवाने जा रहे हैं।

जहां इनको रखा जा सकेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि

मगरमच्छ ग्रामीणों पर हमला नहीं करते।

ये हमले तो करते हैं मगर किसी को

ज्यादा नुकसान नहीं होता है।

आश्चर्य नहीं कि गुजरात में विशाल सरीसृप प्रजातियों के लिए

चरोतार की आर्द्रभूमि इनके लिए सबसे सुरक्षित आश्रय साबित हुई है।

अगर हम मगरमच्छों के लिए सुरक्षित पनाहगाहों की बात करें

तो महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अनूठे गांव शेतपाल में भी ऐसा ही नजारा आपको दिखाई देगा।
जहां सांपों को परिवार माना जाता है।

Where do snakes appear in the school

शेतपाल घरों की तो आप बात ही छोड़ दीजिए। शालाओं में भी आपको सांप रेंगते हुए मिल जाएंगे।

 

Where do snakes appear in the school

शेतपाल में, लोगों के घरों के आसपास और यहां तक ​​कि स्कूल की

कक्षाओं के माध्यम से सांपों को देखना एक आम बात है।

वास्तव में, गाँव का प्रत्येक घर, चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो,

एक खोखला स्थान रखता है जिसे देवस्थानम

(देवता का निवास) के रूप में जाना जाता है,

जहाँ साँप किसी भी समय आराम कर सकते हैं ।

 

Latest news
Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here