राज्योत्सव 2022: सहजता की सीख देता महोत्सव

RAIPUR: छत्तीसगढ़ की राजधानी में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में हिस्सा लेने दुनिया के कई देशों के ट्राइबल कलाकार आए हुए हैं. इस बहाने कई राज्य़ों और देशों के आदिवासी समाज को करीब से देखने का मौका मिला. भले ही रंग रूप बोली भाषा जुदा हो लेकिन इस समाज की एक खासियत समान रूप से दिखी वो है इनकी सहजता. आदिवासी बस्तर का हो या फिर उत्तर पूर्व का या फिर अफ्रीका का या फिर आस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश का वो बेहद सरल है. वो इस तेज रफ्तार जीवन शैली के बीच भी अपनी परंपराओं से बंधा हुआ है. वो प्रकृति की गोद में बेहद सिमित संसाधन पाकर भी खुश है. दुनिया भर के आदिवासी कलाकारों को इस तरह जोड़ने की पहल की सराहना हम पहले भी कर चुके हैं.

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छत्तीसगढ़ के 22 वें राज्योत्सव के अवसर पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव के मंच से प्रस्तुत नृत्य , गीत , संगीत मनुष्य की आदिम लय और सामूहिकता का प्रतीक बनकर प्रकृति और परंपरा के साथ जुड़ाव की अभिव्यक्ति बनकर जनमानस के दिलो दिमाग़ पर छाये रहे । अधिकांश नृत्य एक गोल घेरे में अपनी प्रस्तुति देते दिखे जो यह बताते हैं की आदिवासी समुदाय को नृत्य करने के लिए किसी सुव्यवस्थित मंच की ज़रूरत नहीं है ।

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सांस्कृतिक केन्द्रों या अलग इंवेट कंपनियों के माध्यम से ही सही बुलाये गये अधिकांश डांस ग्रूप अपनी परंपरागत नृत्य शैली , वेशभूषा और वाद्ययंत्र और गीत संगीत के प्रस्तुति करते दिखे । कुछ ने कोरियोग्राफ़र की मदद से निर्णायकों और लोगों को प्रभावित करने के लिए भी थोड़ी बहुत उछलकूद की ,कैमरे के लिये दृश्य बनाये ।
छत्तीसगढ़ एक आदिवासी आबादी बाहुल्य राज्य हैं जिनका बड़ा हिस्सा वनों से आच्छादित है । यहाँ के आदिवासी वैसे ही प्रकृति के क़रीब हैं जैसे की दुनिया के बाक़ी हिस्सों के । छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का तीसरी बार हुए इस आयोजन में भी पिछले दो आयोजनों की तरह ही आदिम संस्कृति की झलक देखने मिली । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नगाड़ा बजाकर इस समारोह की शुरुआत की । दो अलग अलग श्रेणियों में हुई इस नृत्य प्रतिस्पर्धा में प्रकृति के साथ,पर्यावरण और दुनियाभर की आदिम संस्कृति में एकरूपता दिखाई दी ।

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वर्ष 2019 से प्रारंभ यह डांस फ़ेस्टिवल वर्ष 2020 में कोरोना की वजह से नहीं हो पाया । 2021 में दूसरा राष्ट्रीय डांस फ़ेस्टिवल हुआ । पहले समारोह में जहां 1262 आदिवासी कलाकारों ने हिस्सा लिया वहीं 6 देश लंका , यूगांडा , मालदीव , थाईलैण्ड , बांग्लादेश और बेलारूस के 59 ऐथेनिक आर्टिस्टों ने हिस्सा लिया । दूसरे साल 2021 में कोरोना की भीषण त्रासदी से थोड़ी सी निजात पाकर सात देशों के कलाकारों के साथ 1149 कलाकारों ने हिस्सा लिया । इस बार स्विट्ज़रलैंड, माली ,निगारिया,श्रीलंका,फ़िलिस्तीन,यूगांडा और उज़बेकिस्तान के 60 कलाकार हिस्सा लेने आये । धीरे-धीरे ये कारवाँ बढ़ता गया । तीसरे डांस फ़ेस्टिवल में इस बार दस से अधिक देश के डांस ग्रूप ने हिस्सा लिया ।

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खेती ,पर्व, अनुष्ठान एवं विवाह पर आधारित नृत्यों पर आधारित इस राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में भारत के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों समेत दस देशों मोजांबिक, मंगोलिया, टोंगो, रशिया, इंडोनेशिया, मालदीव, सर्बिया, न्यूजीलैंड, इजिप्ट और रवांडा के 1500 जनजातीय कलाकारों ने हिस्सा लिया । आदिवासी जंगल में जिस तरह नाचते सहजता से जीवन जी रहे हैं… ये हमें दिशा देता कि हम थोड़ा आत्ममंथन कर प्रकृति की गोद में जीवन की रौशनी तलाशें..।

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