सुभाष की बात : श्रद्धा हत्याकांड और समाज के सामने उठे सवाल

सुभाष की बात : श्रद्धा मर्डर केस ने मनुष्य की हैवानियत को एक बार फिर हमारे सामने ला कर रख दिया है, एक इंसान कैसे इतना बर्बर हो सकता है, इस पर कई तरह की बातें हो रही है. जिस तरह से इस वारदात को अंजाम दिया गया उससे यही लगता है कि कातिल मानसिक रूप से बीमार है, इसे साइको किलर भी कह सकते हैं. अफताब नाम के जिस शख्स पर इस वारदात को अंजाम देने का आरोप है, पुलिस के मुताबिक उसने वारदात से पहले अमेरिकी क्राइम शो डेक्स्टर समेत कई क्राइम मूवीज और शोज देखे थे।

सबूत मिटाने के लिए गूगल पर खून साफ करने का तरीका भी ढूंढा था। श्रद्धा और अफताब एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिले दोस्ती हुई और फिर साथ में रहने लगे. अगर हम अपने आसपास नजर डाले खास कर महानगर या टियर वन या टू शहर में इस तरह के कई जोड़े मिल जाएंगे जिनकी इसी तरह जान पहचान हुई और वे समाजिक तानेबाने को दरकिनार करते हुए अलग रहने का फैसला कर लेते हैं. इस तरह के संबंधों पर ज्यादातर मामलों में इन जोड़ों के अभिभावक भी जानते हुए भी चुप्पी साधे होते हैं.

देशभर में लगा है प्लास्टिक पर प्रतिबंध, फिर भी रायपुर में धड़ल्ले से जारी है प्लास्टिक का उपयोग

इस तरह के संबंध किसी सामाजिक बंधन में बंधे हुए नहीं होते, दो लोगों के स्थाई या अस्थाई सहमति पर आधारित होते हैं इस तरह के ज्यादातर संबंध. सोशल मीडिया के इस जमाने में जितनी तेजी से ये बनते हैं आकार लेते हैं और बिखर जाते हैं उसके कई उदाहरण आप आसपास ही देख सकते हैं.
हालांकि लिव इन रिलेशनशिप के संबंध में हमारा कानून एक सकारात्मक रुख रखता है.. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी की थी कि “अगर दो लोग अपनी मर्जी से साथ में रहते हैं और फिर उनके संबंध खराब हो जाते हैं, तो ऐसे में पुरुष के खिलाफ दुष्कर्म का केस नहीं बनता.”

नम्रता मल्ला के हॉट लूक देख पसीना-पसीना हुए फैंस…

इसी तरह एक अन्य मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पुरुष और महिला सालों तक पति-पत्नी की तरह साथ रहते हैं, तो मान लिया जाता है कि दोनों में शादी हुई होगी और इस आधार पर उनके बच्चों का पैतृक संपत्ति पर भी अधिकार होगा.
इस तरह रह रहे एक जोड़े की सुरक्षा से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे संविधान के आर्टिकल 21 के तहत दिए राइट टू लाइफ़” से जोड़ा था. हालांकि सामाजिक नजरिया अभी भी इस तरह के संबंधों को लेकर बहुत उदार नहीं हुआ है.

मुंबई इंडियंस के इस धुरंधर खिलाडी ने IPL खेलने से किया इंकार

हम जघन्य श्रद्धा हत्याकांड की बात कर रहे थे. इस हत्याकांड का दूसरा पहलू सोशल मीडिया पर भी विचार कर ही लेते हैं, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ने जहां कई संभावनाएं हमारे सामने लाए हैं वहीं इसकी रफ्तार, लोगों को जोड़ने का इसक बेलगाम तरीका, लोगों को एक वर्चुअल दुनिया का निवासी बनाते जाने की इसकी ताक़त हमारे सामाजिक जीवन को गहरे तक प्रभावित कर रही है. आज हम एक घर में रहकर परिवार के सदस्यों को उतना समय नहीं दे पा रहे हैं जितना कि सोशल मीडिया में बिताते हैं. कहीं न कहीं इससे आपसी रिश्ते बिखरते जा रहे हैं. लोग इन प्लेटफॉर्म में अंजान लोगों पर भरोसा जता रहे हैं या एक अंजान दुनिया में खीचे चले जा रहे हैं. आज इस तरह दोस्ती डेटिंग कराने वाले ढेरों एप्लिकेशन आ गए हैं. एक तरह तकनीक के विकास का ये पक्ष परिवार जैसे यूनिट को नुकसान पहुंचा रहा है, एक सर्वे के मुताबिक आज भारत जैसे देश में 3 से 4 चार साल की कच्ची उम्र में ही बच्चों में यूट्यूब और मोबाइल गेम्स को लेकर रूझान शुरू हो जाता है. कोविड-19 के बाद इसका चलन और बढ़ा है. इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है.

Bollywood Desk : अरबाज अपने से आधी उम्र की इस मॉडल को कर रहे डेट, देखें तस्वीर…

इस हत्याकांड की जघन्यता ने आम इंसान को हिलाकर रख दिया है. लेकिन एक और रंग इस कांड को देने की कोशिश सोशल मीडिया के साथ साथ नेशनल मीडिया पर भी इसे दो धर्मों से जोड़कर दिखाने की भरपूर कोशिश हुई है. इसे लव जिहाद तक कहा जा रहा है. इस हत्याकांड से जुड़ी जो बातें हो रही हैं उनमें से ये पहलू बेहद खतरनाक है. हमें इस तरह के मामलों को साम्प्रदायिक रंग देने से बचना चाहिए.

श्रद्धा हत्याकांड अभी कुछ दिनों तक मीडिया में छाए रहेगा, कुछ दिनों में नया मामला हाथ लगते ही ये कहीं गुम हो जाएगा लेकिन इस हत्याकांड से जुड़ी ये तमाम बातें समाज के सामने सवाल बनकर जवाब ढूंढते रहेंगे, इस पर अब समाज को विचार करना होगा. हमें युवाओं को परिवार को समय देना ही होगा. ताकी वे रिश्ते या प्यार की तलाश में किसी अंजान राह पर न चल पड़ें जहां से लौट पाना बहुत कठिन हो…।

प्रसंगवश- हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी,
जिसको भी देखना कई बार देखना

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *