पूर्व मुख्यमंत्री का बयान लाएगी पार्टी में एकजुटता!

Bhanupratappur By-election छत्तीसगढ़ की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह का बयान महत्वपूर्ण है। हालांकि इससे पहले भी वे इस तरह के मिले-जुले बयान दे चुके हैं। लेकिन भानुप्रतापपुर उपचुनाव के दौरान यह बयान काफी महत्वपूर्म हो जाता है। दरअसल, भूपेश सरकार के गठन के बाद प्रदेश की राजनीति 90 डिग्री घुम चुकी है। प्रदेश के जातिगत समीकरण में जिस तरह से ओबीसी राजनीति का दबदबा दिख रहा है वह पहले कभी नहीं दिखा था। कांग्रेस में ओबीसी नेतृत्व  देने के बाद हाल में भाजपा में ओबीसी नेताओं को प्रमुख स्थान देना इस बात का ज्योतक है कि, प्रदेश की राजनीति ओबीसी पर अधिक केन्द्रीत है।

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ब्रम्हानंद डॉ रमन सिंह की पसंद

अब जबकि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का यह बयान की अगले साल प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर लड़ा जाएगा। यह कहना भी ओबीसी राजनीति में महत्वपूर्ण है। क्योंकि दूसरी पंक्ति के नेता प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष ओबीसी वर्ग से हैं। इस बयान से एक तरह से प्रदेश में ओबीसी राजनीति को और भी बल मिलेगा। हालांकि अभी उपचुनाव भानुप्रतापपुर सीट एसटी रिजर्व में हो रहा है। लेकिन डॉ. रमन सिंह के बयान से यह भी जाहिर होता है कि, भाजपा आने वाले प्रदेश के विधानसभा चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ेगा। भले ही प्रदेश की राजनीति ओबीसी केन्द्रीत हो लेकिन भाजपा में मुख्यमंत्री को लेकर सभी वर्ग के नेताओं के लिए दरवाजे खुले हैं। ऐसे में जिस तरह से गुटीय राजनीति पार्टी में हावी होती है उससे भाजपा को आसानी से मूक्ति मिल जाएगी। और कार्यकर्ताओं में एकजुटता सामने आएगी। वैसे यह बात भी नहीं भूलना चाहिए की भानुप्रतापपुर में भाजपा की ओर से ब्रम्हानंद नेताम को टिकट दिया गया है। जिसे पिछली बार भी चुनाव लड़ाया गया था। यानी ब्रम्हानंद डॉ रमन सिंह की ही पसंद है। रमन सिंह का बयान जो भी हो लेकिन पार्टी नेतृत्व उनकी पसंद का ख्याल रख रहे हैं यह भी तय है।

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इधर संघ परिवार प्रदेश में जिस तरह से सक्रिय है वह भी देखने को मिल रहा है। दो दिनों के प्रवास पर सरसंघ चालक पूर्वी छत्तीसगढ़ का दौरा कर लौटे हैं और इधर संघ के ही राममाधव का दौरा रविवार से शुरू हो रहा है। वे भी रायपुर व बिलासपुर में संघ की बैठक लेकर लौटेंगे। हालांकि संघ की गतिविधि राजनैतिक नहीं होती लेकिन संघ को सक्रिय करने से भाजपा को बैक सपोर्ट मिलता है। फिलहाल उपचुनाव के रिजल्ट अगले साल के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस चुनाव में भाजपा अगर कड़ी टक्कर दे दे तो भी कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हो सकता है। और चुनाव में जीत भाजपा के लिए संजीवनी का काम करेगा। ऐसी स्थिति में फिलहाल उपचुनाव में एकजुटता का संदेश पूर्व मुख्यमंत्री ने दे दिया है।

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