Complete analysis of Gujarat elections 2022: भाजपा का भय, कांग्रेस का KHAM वाला दांव, आप के दावे और भी बहुत कुछ

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Complete analysis of Gujarat elections2022: भाजपा का भय, कांग्रेस का KHAM वाला दांव, आप के दावे और भी बहुत कुछ

 

जनधारा 24 पाॅलिटिकल डेस्क । Complete analysis of Gujarat elections 2022:

गुजरात की 182 विधानसभा सीटों के लिए चुनावी प्रचार जोरों से चल रहा है।

Complete analysis of Gujarat elections 2022: 27 सालों से सत्तासीन भाजपा ने इस बार पूरी ताकत झोंक दी है।

पूरे देश के तमाम कद्दावर नेताओं को गुजरात में प्रचार करने के लिए भेज दिया गया है।

आखिर भाजपा को किससे है डर ?

क्या है कांग्रेस का KHAM वाला दांव ?

क्या सही निशाने पर लगेगा केजरीवाल का तीर ?

भाजपा को कितना नुकसान पहुंचा पाएंगे ओवैसी के वीर ?

Complete analysis of Gujarat elections 2022: सब कुछ आपको बताएंगे, बस आप बने रहिए जनधारा 24 के साथ-

What is Complete analysis of Gujarat elections 2022:

Complete analysis of Gujarat elections2022: भाजपा का भय, कांग्रेस का KHAM वाला दांव, आप के दावे और भी बहुत कुछ
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गुजरात का चुनावी समर सज कर तैयार है।

भाजपा यहां 27 साल से सत्ता में है। तो कांग्रेस वनवास पर।

आम आदमी पार्टी अपनी सियासी जमीन तलाश रही है।

तो वहीं एआईएमआईएम भी मुस्लिम वोटों के दम पर सत्ता हथियाने की फिराक में है।

यही कारण है कि गुजरात में बीजेपी के खिलाफ

मामला त्रिकोणीय हो गया है।

यहां हम आपको ये भी बता दें कि कांग्रेस ने

यहां हमेशा भाजपा को करारी टक्कर दी है।

Complete analysis of Gujarat elections 2022:

यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी ने

इस बार गुजरात चुनावों में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

पूरे देश के तमाम कद्दावर नेताओं को

गुजरात स्टार प्रचारक बनाकर

प्रचार करने के लिए बुलाया जा रहा है।

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार गुजरात के चक्कर लगा चुके हैं।

वहीं अमित शाह भी अपने अंदाज में

गुजरात के मतदाताओं के मन की थाह लेने में लगे हैं।

कुल मिलाकर लगता है कि इस बार चुनावों में

भाजपा कुछ ज्यादा ही डरी हुई है।

तो क्या है भाजपा के इस डर का कारण ? आज हम इसी का विश्वलेषण करेंगे।

भाजपा की कांग्रेस से सीधी टक्कर

अगर सही में देखा जाए तो गुजरात में भाजपा की

सीधी टक्कर कांग्रेस पार्टी से है।

यही कांग्रेस पार्टी है जिसने 2017 के चुनावों में

भाजपा को करारी टक्कर दी थी।

उस साल भाजपा को महज 99 सीटों पर

संतोष करना पड़ा था।

इस बार गुजरात चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने

अपनी रणनीति में काफी बदलाव किया है।

पहले कांग्रेस पार्टी के नेता चुनावों में

गलत बयानी कर दिया करते थे।

इस बार कोई भी नेता ऐसा नही ंकर रहा है।

तो वहीं पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी

भारत जोड़ो यात्रा कर रहे हैं।

कांग्रेस ने इस बार एक अलग दांव खेल रही है।

क्या है कांग्रेस का KHAM फार्मूला

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गुजरात चुनावों में इस बार कांग्रेस KHAM फॉर्मूले पर फोकस कर रही है।

कांग्रेस वर्तमान में क्षत्रिय ओबीसी, हरिजन,

आदिवासी और मुस्लिम (KHAM) मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

जो कुल मतदाताओं का 75 प्रतिशत हैं।

खाम फॉर्मूले की मदद से कांग्रेस ने 1985 में 182 में से 149 सीटें जीती थीं।

हालांकि कहा जा रहा है कि एआईएमआईएम

और आप गुजरात में कांग्रेस का समीकरण बिगाड़ सकते हैं।

कई सीटों पर वोट बंटने की भी संभावना जताई जा है।

AIMIM ने उतारा 14 सीटों पर उम्मीदवार

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AIMIM ने अब तक गुजरात विधानसभा की 182 में से

14 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।

AIMIM द्वारा जारी दूसरी सूची के अनुसार वडगाम से

कल्पेश भाई सुंधिया,

सिद्धपुर विधानसभा सीट से अब्बास भाई नोडसोला

और वेजलपुर विधानसभा सीट से जैन बीबी शेख चुनाव लड़ेंगे।

AIMIM के चुनाव लड़ने से अब यह सवाल उठ रहा है कि

क्या इससे मुस्लिम वोट पाने वाली कांग्रेस को नुकसान होगा ?

आम आदमी पार्टी तलाश रही जमीन

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गुजरात चुनावों में आम आदमी पार्टी अपनी नई जमीन तलाश रही है।

पंजाब में सरकार बनाने के बाद अगर पार्टी गुजरात में

भी सरकार बनाने में सफल हो जाती है,

तो उसे राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता मिल जाएगी।

इस बार आम आदमी पार्टी ने नए जोश के

साथ एंट्री की है

। इससे कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए

मुकाबला मुश्किल हो गया है।

लेकिन यहां बीजेपी के लिए दांव बहुत बड़ा है।

क्या गुजरात में सही निशाने पर लगेगा केजरीवाल का तीर

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गुजरात चुनावों में नई दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने

भी अपने हाथ में धनुष संभाल लिया है।

क्या उनका निशाना सही लगेगा ?

हालांकि केजरीवाल ने अपनी सियासी समझ का परिचय देते हुए

भाजपा के हिंदुत्व वाले मुद्दे को तो हथिया लिया है।

अब इनकी ये कोशिश गुजरात के मतदाताओं को

कितना प्रभावित कर पाएगी ?

ये तो 8 दिसंबर को ही पता चल पाएगा।

क्यों भाजपा ने झोंकी पूरी ताकत

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2012 में बीजेपी ने यहां 115 सीटों पर जीत हासिल की थी,

लेकिन 2017 में कांग्रेस से मुकाबले के चलते

उसकी सीटें घटकर 99 रह गईं।

हालांकि ये अलग बात है कि अब कांग्रेस के

कई विधायक बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।

2001 में नरेंद्र मोदी के गुजरात का सीएम

बनने के बाद बीजेपी का यह सबसे खराब प्रदर्शन था।

बीजेपी 2017 के चुनाव में सीटों की कमी के

दर्द से उबर नहीं पाई है।

इसलिए बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इस बार

गुजरात में पूरी ताकत झोंक दी है।

 

अभी पिछले ही महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र

मोदी तीन बार गुजरात के जा चुके हैं।

गुजरात मोदी और शाह का गृह राज्य है।

यही कारण है कि गृह मंत्री अमित शाह भी गुजरात दौरे पर हैं।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अध्यक्ष जेपी नड्डा

भी पूरे लाव – लश्कर के साथ राज्य के दौरे पर हैं।

 

आम आदमी की एंट्री से कड़ा हुआ मुकाबला

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस बार गुजरात में पूरी ताकत लगा रहे हैं।

केजरीवाल यहां बीजेपी को चुनौती देते नजर आ रहे हैं।

भले ही राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के चलते

राज्य का ज्यादा दौरा नहीं कर पा रहे हों,

लेकिन उनकी पार्टी ने योजनाबद्ध तरीके से

यहां अपना अभियान भी शुरू कर दिया है।

 

प्रधानमंत्री मोदी भी कर चुके हैं आगाह

यही वजह है कि बीजेपी यहां पहले से कुछ ज्यादा सतर्क नजर आ रही है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां 10 अक्टूबर को भाजपा कार्यकर्ताओं

को कांग्रेस के चुपचाप प्रचार को लेकर आगाह किया।

पीएम मोदी ने कहा, पहले के चुनावों में कांग्रेस खूब शोर मचाती थी।

बीजेपी का सफाया करने की शेखी बघारती थी।

लेकिन हम 20 साल में नहीं हारे हैं,

इसलिए उन्होंने कुछ नया किया है।

इसलिए हमे अब सतर्क रहने की जरूरत है।

 

क्या कहते हैं सियासी गलियारों के विश्वलेषक

विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी के सामने इस बार कांग्रेस के साथ-साथ आम आदमी पार्टी से भी चुनौती है।

कांग्रेस भाजपा और आम आदमी पार्टी की हिंदुत्व की

राजनीति के बारे में मतदाताओं को सावधान करने की कोशिश कर रही है।

दूसरी ओर आम आदमी दिल्ली मॉडल पर चुनाव जीतने की योजना बना रहा है।

आम आदमी पार्टी दिल्ली की तर्ज पर सरकारी कर्मचारियों,

मोहल्ला क्लीनिकों का वेतन बढ़ाने, मुफ्त स्कूली शिक्षा

और ज्यादा से ज्यादा सरकारी स्कूल खोलने की बात कर रही है।

इसके साथ ही वह बीजेपी की तरह हिंदू पहचान की भी बात कर रही हैं।

क्यो घबराई हुई है भाजपा ?

एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्वलेषक का कहना है कि

बीजेपी कांग्रेस से ज्यादा आम आदमी पार्टी को चुनौती के रूप में देख रही है

क्योंकि वह उसी की भाषा में बात कर रही है।

यानी आम आदमी पार्टी भी अब हिंदुत्व की भाषा बोल रही है।

आम आदमी पार्टी के गुजरात प्रमुख गोपाल इटालिया ने

बीजेपी के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया है।

वह राज्य के प्रभावशाली पाटीदार समुदाय से

ताल्लुक रखते हैं, इसलिए उनकी अपील है।

पार्टी गुजरात के निम्न मध्यम वर्ग पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

इस वर्ग के सामने जिस तरह का आर्थिक संकट खड़ा हो गया है ।

और नौकरी और शिक्षा को लेकर जो समस्याएं आ रही हैं,

आम आदमी पार्टी के वादे लुभावने हैं।

इसलिए अब बीजेपी आम आदमी पार्टी से ज्यादा चुनौती महसूस कर रही है।

क्यों है बीजेपी का यह आक्रामक रवैया

कुछ अन्य विश्लेषकों की नजर में भी बीजेपी को कांग्रेस से

ज्यादा आम आदमी पार्टी से चुनौती नजर आ रही है।

कुछ लोगों का कहना है कि बीजेपी इस बार घबराई हुई दिख रही है,

इसलिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के खिलाफ काफी आक्रामक है।

हाल ही में आम आदमी पार्टी के नेता इसुदन गढ़वी के

खिलाफ राज्य सरकार की कार्रवाई को लोग

उनकी घबराहट से जोड़कर देख रहे हैं।

लेकिन एक वरिष्ठ महिला पत्रकार ऐसा नहीं मानतीं।

उन्होंने कहा, बीजेपी नर्वस नहीं है।

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वह ऐसा होने का नाटक करती है

लेकिन ऐसा नहीं है। मैंने बीजेपी को 2007 से

बहुत आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ते देखा है,

चाहे वह नगर निगम हो, पंचायत हो, विधानसभा हो या लोकसभा चुनाव.।

बीजेपी बहुत फोकस के साथ चुनाव लड़ती है

और माइक्रो मैनेजमेंट पर पूरा ध्यान देती है।

पहले ये काम मोदी जी करते थे अब अमित शाह कर रहे हैं।

बीजेपी के तेवरों से उसकी घबराहट नहीं

बल्कि उसका बढ़ता फोकस दिख रहा है।

इस बार वह पहले से ज्यादा ध्यान देकर चुनाव लड़ रही हैं।

शहरी इलाकों में भले ही कांग्रेस का असर नहीं दिख रहा हो,

लेकिन कुछ ग्रामीण इलाकों के दौरे के दौरान मैंने पाया कि

यहां कांग्रेस को खारिज करना आसान नहीं है।

इन इलाकों में कांग्रेस की ताकत बीजेपी के सामने चुनौती है।

लेकिन आम आदमी पार्टी की एंट्री ने इस चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ये चुनाव

असल में गुजरात का यह चुनाव मोदी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

पहले लोगों की धारणा थी कि आम आदमी पार्टी बीजेपी की बी टीम है।

लेकिन राज्य में इसके नेता ईशुदान गढ़वी के खिलाफ हुई

कार्रवाई के बाद यह काफी आक्रामक हो गया है

और गंभीरता के साथ मैदान में उतर गया है।

वह भाजपा के खिलाफ सड़कों पर उतरकर संघर्ष कर रही हैं। ,

गुजरात चुनाव मोदी और बीजेपी के लिए बहुत अहम हैं

क्योंकि यह उनके लिए 2024 के लोकसभा चुनाव का रिहर्सल होगा।

भाजपा का आला नेतृत्व इसी गुजरात माॅडल को आगे रखकर पूरे देश में चुनाव लड़ेगा।

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