Political tonic of Mallikarjun Kharge: क्या है मल्लिकार्जुन खरगे का खास टाॅनिक, कैसे देगा कांग्रेस पार्टी को मजबूती.. जानें

Political tonic of Mallikarjun Kharge

Political tonic of Mallikarjun Kharge

 

जनधारा 24 पाॅलिटिकल डेस्क। Political tonic of Mallikarjun Kharge:

भारत की सबसे पुरानी सियासी पार्टी दिनोंदिन कमजोर होती जा रही है।

उधर हिमाचल प्रदेश और गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं।

सभी पार्टियों ने अपने -अपने प्रचारकों को दोनों ही राज्यों में भेज रखा है।

गुजरात में तो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तूफानी रैलियां कर रहे हैं।

इन चुनावों में इस बार खास बात ये है कि कांग्रेस ने चुप्पी साध रखी है।

पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पर हैं।

ऐसे में अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे

एक ऐसा टाॅनिक ईजाद करने जा रहे हैं,

जो कांग्रेस पार्टी को मजबूती देगा।

उसके कार्यकर्ताओं में नए साहस का संचार करेगा।

What is the political tonic of Mallikarjun Kharge?

Political tonic of Mallikarjun Kharge: क्या है मल्लिकार्जुन खरगे का खास टाॅनिक
Political tonic of Mallikarjun Kharge: क्या है मल्लिकार्जुन खरगे का खास टाॅनिक

कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मान बढ़ाने और नेताओं का

अभिमान कम करने के लिए एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे

कांग्रेस जनसंपर्क अभियान चलाने जा रहे हैं।

इस अभियान का मुख्य काम होगा कांग्रेस कार्यकर्ताओं

और नेताओं के बीच की दूरी को खत्म करना।

इसी कड़ी में खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष सोमवार को

सुबह 11 से 1 बजे के बीच पार्टी मुख्यालय में

सामान्य नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे।

इस दौरान कोई भी कांग्रेस का

कार्यकर्ता उनसे आसानी से मिल सकता है।

अपनी समस्याएं भी साझा कर सकता है।

इस तरह हर महीने में दो दिन कार्यकर्ताओं की

खरगे से मुलाकात की योजना बनाई गई है।

कुछ वर्षों पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी ने भी

पार्टी दफ्तर में सामान्य नेताओं से मिलना शुरू किया था।

उनका यह सिलसिला कुछ हफ्ते में ही बंद हो गया था।

ऐसे में अब देखना यह होगा कि क्या इस बार

यह सिलसिला लंबा चलता है या

2014 की तरह ही यह भी कुछ हफ्तों में ख़ुद ही ख़त्म हो जाता है ?

 

क्या है इसका खास मकसद

असल में मल्लिकार्जुन खरगे का मकसद है कि कांग्रेस को ताकत मिले।

साथ ही कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच की दूरी को खत्म किया जा सके।

वह इसे लेकर तमाम कार्यकर्ताओं से बातचीत करेंगे।

उनकी परेशानी सुनेंगे और उन्हें हल करने की कोशिश करेंगे।

इसके लिए कोई भी कार्यकर्ता बिना अपॉइंटमेंट

उनसे मुलाकात कर सकता है।

इससे नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच एक

आपसी संबंध बनेगा।

यही संबंध पार्टी को मजबूती प्रदान करेगा।

 

सियासत का लंबा तजुर्बा है खरगे के पास

एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष खरगे के पास काफी अच्छा सियासी अनुभव है।

वे इसका फायदा जरूर उठाएंगे।

छत्तीसगढ़ में जब भूपेश बघेल बनाम सिंहदेव की

सियासी रस्साकसी चल रही थी।

उस वक्त भी सोनिया गांधी ने मल्लिकार्जुन खरगे को

पर्यवेक्षक बनाकर छत्तीसगढ़ भेजा था।

उसके बाद नई दिल्ली में चली मैराथन बैठकों के

बाद छत्तीसगढ़ के भाग्य का फैसला किया गया था।

देश में कांग्रेस एकदम कमजोर

ये बताने की कोई जरूरत नहीं है कि देश में कांग्रेस बेहद कमजोर हो चुकी है।

कांग्रेस के तमाम कार्यकर्ताओं ने इससे तौबा करना शुरू कर दिया है।

ऐसे में अगर खरगे का ये खास फार्मूला काम कर गया

तो इससे पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं में नया जोश आएगा।

इसका फायदा पार्टी को इन होने

वाले चुनावों में भी साफ- साफ दिखाई देगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *