Margashirsha Amavasya 2022: पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए करें तर्पण, जानें…

 

Margashirsha Amavasya 2022:  हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को अघन अमावस्या या मार्गशीर्ष अमावस्या के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस अमावस्या का विशेष महत्व है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन स्नान के साथ ही पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध आदि कर्म किए जाते हैं। ऐसा करने से पितरों के लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। जानिए मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन कैसे करें पितरों का तर्पण।

 शुभ मुहूर्त और महत्व

मार्गशीर्ष अमावस्या 2022 मुहूर्त
मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की शुरुआत 23 नवंबर 2022 दिन बुधवार को सुबह 06 बजकर 53 मिनट से होगी और अमावस्या तिथि का समापन 24 नवंबर 2022 को सुबह 04 बजकर 26 मिनट पर होगा.

स्नान और दान का शुभ मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 06 मिनट से 06 बजकर 52 मिनट तक

मार्गशीर्ष अमावस्या 2022 पर ऐसे करें पितर
पितरों को जल चढ़ाने की विधि को तर्पण कहते हैं। सबसे पहले हाथों में कुश लेकर दोनों हाथों को जोड़कर पितरों का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद उन्हें अभिमंत्रित करते हुए इस मंत्र का जाप करें- ‘ॐ आगछन्तु मे पितर एव गृहणतु जलांजलिम्’ अर्थात हे पितृगण, आकर जलांजलि ग्रहण करें।

ऐसे करें पिता की पूजा

यदि आप पितृ तर्पण कर रहे हैं तो अपने गोत्र का नाम लेते हुए इस मंत्र का जाप करें, गोत्रे अस्मत्पिता (पिता का नाम) शर्मा वसुरूपत त्रिप्यतामिदं तिलोदकम् गंगा व तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः। इस मंत्र को पढ़ने के साथ ही दूध, तिल और जौ को गंगाजल या जल में मिलाकर 3 बार जलांजलि पिता को दें।

इसी तरह अगर दादाजी को दे रहे हैं तो अस्मत पितामह के स्थान पर अस्मत पितामह का प्रयोग करें।

ऐसे करें मां की पूजा

शास्त्रों के अनुसार माता का प्रसाद पिता से अलग होता है। क्योंकि मां का कर्ज सबसे बड़ा होता है। इसलिए उन्हें बार-बार पानी देने का विधान है। जानिए मां को भोग लगाने की विधि.

माता को जल देने का मंत्र:-

अपने गोत्र का नाम लेते हुए, गोत्रे असमानमाता (माता का नाम) देवी वसुरूपस्त त्रिप्यतमिदम तिलोदकम् गंगा जल व तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः कहें। इस मंत्र का जाप करते हुए 16 बार पूर्व दिशा में, 7 बार उत्तर दिशा में और 14 बार दक्षिण दिशा में जालांजलि देनी चाहिए।

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