Sinhora demand all over the world : सिंहोरा की पूरी दुनिया में मांग, फिर भी गरीबी से जूझ रहे कारीगर

Sinhora demand all over the world :

Sinhora demand all over the world :

जनधारा 24 न्यूज डेस्क। Sinhora demand all over the world :

भारतीय संस्कृति में हर छोटी-बड़ी चीज का बड़ा महत्व है।

शादी से लेकर मौत तक कई ऐसी चीजें हैं, जिनकी बड़ी मान्यता है।

 

Sinhora demand all over the world

वहीं दूसरी ओर समाज में कुछ लोग ऐसे भी हैं

जो अपने हाथों से उन चीजों को तराशते हैं,

जिनका उपयोग बाद में विभिन्न संस्कारों

में किया जाना बेहद जरूरी माना जाता है।

इसी कड़ी में हिन्दू विवाह संस्कारों में

सिंहोरा का बड़ा महत्व है।

कहा जाता है कि सिंहोरा नवविवाहिता की

डोली के साथ उसके मायके से आता है

और उसकी अर्थी के साथ चला जाता है।

 

सिंदूरदान (सिंहोरा) विवाह जैसे शुभ कार्य में

सबसे शुभ और महत्वपूर्ण विषय है।

सिंदूर जिसे सुहागिन का सबसे बड़ा श्रृंगार

भी कहा जाता है।

सिंदूर जिस पात्र में रखा जाता है

उसे सिंहोरा कहते हैं।

यह आम की लकड़ी से बना होता है

और कभी खराब नहीं होता।

 

लगन के मौसम में बढ़ती है मांग

फिलहाल शादियों का सीजन चल रहा है

ऐसे में इसकी डिमांड भी बढ़ेगी।

लेकिन गोरखपुर में इसे बनाने वाले

कारीगर फिलहाल इसकी लकड़ी

और इसमें इस्तेमाल होने वाले रंग को लेकर काफी चिंतित हैं।

कारीगरों के अनुसार गोरखपुर में इसकी

लकड़ी आसानी से नहीं मिलती।

उसे बिहार से लाना है।

जिससे खर्चा बढ़ता जा रहा है।

सिंहोरा में लाल रंग का प्रयोग किया जाता है।

जो पहले 500 से 600 रुपए में मिल जाता था।

अब इसकी कीमत 1800 रुपए हो गई है।

 

कैसे सिंहोरा पर माउंट होता है स्कूनर

Sinhora demand all over the world :
Sinhora demand all over the world :

सिंहोरा पर स्कूनर को माउंट करने के लिए एक विशेष तकनीक का भी

उपयोग किया जाता है।

गोरखपुर के पांडेय हाटा बाजार में इसके निर्माण का

कार्य चंद चुनिंदा परिवारों द्वारा सैकड़ों वर्षों से किया जाता है।

जिनके द्वारा बनाया गया यह सिंहौरा न

केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि देश के कई हिस्सों में भेजा जाता है।

सिंहोरा सुहागिन स्त्री के सुख का राग

माना जाता है कि सिंहोरा का अर्थ होता है मांग का सिंदूर।

यही एक मात्र प्रतीक है जो वधू पक्ष को तब भी

नहीं छोड़ता जब उसकी सांस फूल जाती है।

पति की चिता पर भी साथ दें और साथ दें।

शायद सात जन्म पति के साथ घूमने का वादा

निभाने के लिए।

यही वजह है कि सौन्दर्य प्रसाधनों से जुड़े

तमाम प्रयोगों के बीच सिंदूर का महत्व कभी कम नहीं हुआ

और सिंहोरा का भी।

सिंहोरा सिंदूर रखने के योग्य नहीं होता है,

लेकिन इसे हर सुहागिन स्त्री का सौभाग्य कहा जाता है।

 

100 साल से पीढ़ी दर पीढ़ी किया जा रहा है यह काम 

Sinhora demand all over the world :
Sinhora demand all over the world :

इसका निर्माण गोरखपुर के पांडेय हाटा के खरड़ टोला में होता है।

इस गांव में करीब 100 साल से भी ज्यादा समय से

इसे खास और चुनिंदा परिवारों द्वारा बनवाया जा रहा है।

 

सिहोरा का काम भी महंगाई से अछूता नहीं

इसके निर्माण में लगी मेहनत और लागत के हिसाब से देखा

जाए तो इसके कारीगरों को कम कीमत मिलती है।

लेकिन इतनी मुश्किलों के बावजूद लकड़ी के

ये कलाकार इसे भाव और शुभता के साथ बनाने से पीछे नहीं हट रहे हैं।

हालांकि, मौजूदा दौर में इसमें इस्तेमाल होने वाली

लकड़ी और इसमें इस्तेमाल होने वाला लाल रंग जो

चीन से आता है, पहले इसकी कीमत 500 से 600 रुपये

तक हुआ करती थी।

यह अब 1800 रुपये में उपलब्ध है।

इन कलाकारों को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है।

कारीगरों के मुखिया गजेंद्र सिंह का मानना है कि

आने वाली पीढ़ियां अब इस काम को आगे नहीं बढ़ा पाएंगी।

अगर सरकार की ओर से कुछ सहयोग मिले

तो इस काम को और आगे बढ़ाया जा सकता है।

 

किस जाति के लोग बनाते हैं सिंहोरा

Sinhora demand all over the world :
Sinhora demand all over the world :

100 से अधिक वर्षों से कलाकारों की कई पीढ़ियां इस काम में लगी हुई हैं।

यही वजह है कि इसने अपनी पहचान बनाए रखी है।

जबकि इसे तैयार करने वाले कारीगर क्षत्रिय समुदाय से आते हैं।

इसका विक्रेता शुभ कार्यों का जानकार होता है।

सिंहोरा का लाल रंग सामान्य नहीं होता है।

Read More : Google Girl of UP 2022: तीसरी कक्षा की छात्रा और ज्ञान पीएचडी वालों जैसे, जानिए क्या-क्या जानती है रिया

शायद ही किसी को पता होगा कि इसे रंगने के लिए पेंट

या किसी आम रंग का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

इसे एक विशेष प्रकार के लाख से रंगा जाता है।

सिंहोरा को रंगने के लिए केवड़ा का पत्ता ब्रश का काम करता है।

कारीगर हरिश्चंद्र लाख और केवड़े के पत्तों को

शुभ कार्य के लिए शुभ बताते हैं।

हालांकि, इसकी उपलब्धता को लेकर

उनके सामने बड़ी समस्याएं हैं।

विदेशों में भी है इसकी मांग

Sinhora demand all over the world :
Sinhora demand all over the world :

कारीगर हरिश्चंद्र का कहना है कि ये सामग्री चीन से मंगाई जाती है।

जिसकी कीमत अब 3 गुना से ज्यादा हो गई है।

इसे बेचने वाले दुकानदारों की माने तो दुनिया

भर में बसे भारतीयों में गोरखपुर के सिंघोरा की डिमांड है।

विदेशों में रहने वाले कुछ लोग शादी के मौके

पर अपने परिचितों से इसकी मांग करते हैं।

सिंहोरा की नेपाल में भी काफी मांग है। समय के

साथ सिहोरा के निर्माण में मशीन की भूमिका निश्चित रूप से बढ़ गई है।

लेकिन, कारीगरों ने मान्यता और आस्था से

कभी समझौता नहीं किया।

आज भी अधिकांश कारीगर हाथ से

काम करते हुए इसे तराशते हैं।

 

सिंहोरा के बारे में क्या कहते हैं विद्वान

यह जानकर पंडित सतीश मणि त्रिपाठी कहते हैं कि सिंहोरा का महत्व न आज कम हुआ है और न भविष्य में घटेगा। सिंदूरदान और सिंहोरा हिंदू विवाह समारोह में हमेशा महत्व का विषय थे और रहेंगे। इसे विवाह संस्कारों से कभी अलग नहीं किया जा सकता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *