Petrol and diesel rates in India : भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट जल्द ही 150 रुपये प्रति लीटर के पार हो जाएंगे? यह है बड़ा कारण

Petrol and diesel rates in India : भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट जल्द ही 150 रुपये प्रति लीटर के पार हो जाएंगे? यह है बड़ा कारण

Petrol and diesel rates in India : भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट जल्द ही 150 रुपये प्रति लीटर के पार हो जाएंगे? यह है बड़ा कारण

 

Petrol and diesel rates in India : अगर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों की बात करें तो मौजूदा समय में

यह रेट करीब 100 रुपये प्रति लीटर है. पिछले कुछ महीनों से तेल के रेट

में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि इसकी वजह देश

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के अलग-अलग राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव को भी बताया जा रहा है।

इस बीच एक बेहद अहम खबर सामने आ रही है। दरअसल, रूस-यूक्रेन

Petrol and diesel rates in India : भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट जल्द ही 150 रुपये प्रति लीटर के पार हो जाएंगे? यह है बड़ा कारण
Petrol and diesel rates in India : भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट जल्द ही 150 रुपये प्रति लीटर के पार हो जाएंगे? यह है बड़ा कारण

युद्ध के बीच पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के

लिए रूस ने सस्ते दामों पर कच्चा तेल बेचने का तरीका निकाला. इससे

भारत और चीन जैसे कच्चे तेल के बड़े उपभोक्ता देशों को फायदा हुआ,

लेकिन अब जल्द ही इस व्यवस्था पर संकट आ सकता है. यही वजह है

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कि पश्चिमी देश रूस से आने वाले कच्चे तेल की कीमतों पर कैपिंग करने

पर विचार कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या इसका असर भारत पर

भी पड़ेगा और क्या भारत में पेट्रोल के दाम बढ़ेंगे?

मिंट की एक खबर के मुताबिक, यूरोपीय संघ के देशों ने रूसी कच्चे तेल

की कीमत 65 डॉलर से 70 डॉलर प्रति बैरल तय करने का मन बना लिया है।

यह रूस में कच्चे तेल के उत्पादन की लागत से कहीं अधिक है। इतनी

ऊंची प्राइस कैप लगाने से रूस के कच्चे तेल के कारोबार को नुकसान होने

की आशंका है, लेकिन रूस फिलहाल भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल बेच रहा है

, ऐसे में संभव है कि इस कदम का ज्यादा असर न हो।

जी7 देश कीमत तय कर सकते हैं

पेट्रोल-डीजल ताजा अपडेट: खबरों के मुताबिक जी7 देश पहले

रूसी कच्चे तेल के लिए 65-70 डॉलर प्रति बैरल की कीमत कैप कर सकते हैं।

जबकि कई यूरोपीय संघ के देशों का मानना ​​है कि यह कीमत रूस द्वारा

यूक्रेन पर आक्रमण करने से पहले की औसत कीमत के बराबर है।

यह वर्तमान परिस्थितियों के लिए बहुत अधिक है। इस संबंध में

बुधवार को यूरोपीय संघ के राजदूतों की बैठक हुई।

रूसी तेल पर मूल्य सीमा का कारण क्या है?

सोचने वाली बात यह है कि रूसी तेल पर इस कैपिंग

की क्या जरूरत थी? दरअसल, पश्चिमी देश दुनिया में तेल

की कीमतों को नहीं बढ़ने देने के साथ-साथ रूस की आय को

भी सीमित करना चाहते हैं, ताकि रूस-यूक्रेन युद्ध में उसकी ताकत

को कम किया जा सके। लेकिन भारत और चीन जैसे बड़े उपभोक्ता

देशों के ख़रीदने की वजह से रूस इस बारे में ज़्यादा चिंतित

नहीं दिखता क्योंकि वह पहले से ही उन्हें सस्ते दामों पर तेल बेच रहा है.

हालांकि प्राइस कैप लागू होने के बाद अगर कंपनियां

इससे कम कीमत पर कच्चा तेल खरीदती हैं तो उन्हें शिपिंग

, बीमा और वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी। इससे कई और

सुविधाएं वंचित हो जाएंगी और कच्चे तेल के कारोबार का जोखिम बढ़ जाएगा।

क्या भारत में पेट्रोल महंगा होगा?

यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदता आ रहा है।

यह तेल उन्हें भारी डिस्काउंट पर मिल रहा है। इसलिए पश्चिमी देशों के

मजबूत मिजाज के बावजूद दोनों देशों के बीच तेल का व्यापार जारी है।

ऐसे में माना जा रहा है कि रूसी तेल पर प्राइस कैप का असर भारत पर भी पड़ेगा।

हालांकि अगर प्राइस कैप 65 से 70 डॉलर के बीच रहता है तो भारत के

लिए भी ऐसी ही स्थिति होगी क्योंकि भारत को इसी कीमत पर रूस से कच्चा तेल मिल रहा है।

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