2023 विधानसभा चुनाव से पहले भूपेश सरकार का क्या है बड़ा दांव

रायपुर। 2023 विधानसभा चुनाव से पहले भूपेश सरकार ने बड़ा दांव खेला है । आरक्षण पर मचे घमासान के बीच भूपेश कैबिनेट ने आरक्षण कोटा से संबंधित दो विधेयकों को मंजूरी दे दी है । इन विधेयकों को विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया जाएगा । वहां से पास होने के बाद छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को 32 फीसदी आरक्षण मिलेगा । इस फैसले को भूपेश सरकार का बड़ा फैसला माना जा रहा है । भाजपा इसे कांग्रेस की नौटंकी और ड्रामा बता रही है।

संसोधन विधेयकों को विधानसभा में पेश किया जाएगा

बताया जा रहा है कि संसोधन विधेयकों को विधानसभा में पेश किया जाएगा । वहां से पास होने के बाद प्रदेश में आदिवासियों को 32 फीसदी और ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण मिलेगा । यह शिक्षण संस्थानों में दाखिले और सरकारी नौकरी में लागू होगा ।

सरकार ने कहा है कि अगर ये संशोधन विधेयक पारित हो जाते हैं तो राज्य में कुल आरक्षण बढ़कर 76 प्रतिशत हो जाएगा ।

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विधानसभा का विशेष सत्र

इन विधेयकों को पास करने के लिए राज्य में विधानसभा का विशेष सत्र एक और दो दिसंबर को बुलाया गया है ।

फैसले को लेकर पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि आरक्षण के मामले पर कांग्रेस नौटंकी और ड्रामा कर रही है , जो पूरा प्रदेश देख रहा है ।

आरक्षण के खिलाफ अपने ही लोगों से याचिका लगवाती है ।  आरक्षण जब खत्म हो जाता है तो याचिका लगाने वालों को पुरस्कृत किया जाता है।

भूपेश सरकार बताएं क्या 3 दिसंबर से आदिवासियों को नौकरी मिलने लगेगी क्या ?

जो मेडिकल कि सीटों का नुकसान हुआ है उसकी 3 दिसंबर से भरपाई हो जाएगी ? कांग्रेस सरकार ने पिछड़े वर्ग को भी ठगा है ।

राज्य सरकार गंभीर है

कैबिनेट मंत्री रवींद्र चौबे ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद आरक्षण मामले में जिस तरह की स्थिति पैदा हुई है, उसे लेकर राज्य सरकार काफी गंभीर है। यह निर्णय लिया गया है कि उच्च न्यायालय द्वारा रद्द किए गए आरक्षण अधिनियम के प्रावधानों को एक कानून के माध्यम से फिर से प्रभावी बनाया जाए।

इसके लिए लोक सेवाओं में आरक्षण संशोधन विधेयक-2022 और शैक्षणिक संस्थाओं के प्रवेश में आरक्षण संशोधन विधेयक-2022 के प्रारूप को मंजूरी दी गई है । इन विधेयकों को एक-दो दिसम्बर को प्रस्तावित विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार यह कह रही है कि सरकार जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है । वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने भी सामान्य वर्ग के गरीबों को 10% तक(UP TO) आरक्षण देने को उचित बता चुकी है तो उसका भी पालन किया जाएगा।

मंत्री ने कानूनी बाध्यताओं की वजह से विधानसभा में विधेयक पेश होने से पहले आरक्षण का अनुपात नहीं बताया। लेकिन सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि यह ST के लिए 32%, SC के लिए 13%, OBC के लिए 27% और सामान्य वर्ग के गरीबों-EWS के लिए 4% तय हुआ है ।

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मंत्री कवासी लखमा ने कहा – मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बधाई। उन्होंने अब 32% आदिवासी को, अनुसूचित जाति को 13 परसेंट और पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत और सामान्य वर्ग को चार प्रतिशत आज चर्चा के बाद कैबिनेट में पास हुआ है।

अब यह विधानसभा में रखा जाएगा।

जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार की तरफ से 2019 में की गई घोषणा के अनुरूप, विधेयकों में अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत और अनुसूचित जाति को 13 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा

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