Bhanupratappur By-Election : भानुप्रतापपुर उपचुनाव का क्या है मतलब?

Bhanupratappur By-Election : भानुप्रतापपुर उपचुनाव का क्या है मतलब?

Bhanupratappur By-Election : भानुप्रतापपुर उपचुनाव का क्या है मतलब?

Bhanupratappur By-Election : भानुप्रतापपुर उपचुनाव का क्या है मतलब?

Bhanupratappur By-Election : पहले भी इस स्तंभ में लिखा जा चुका है…भानुप्रतापपुर विधानसभा

उपचुनाव सामान्य चुनाव नहीं है। कांग्रेस और भाजपा दोनों

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पार्टियों के नेताओं की प्रतिष्ठा इस चुनाव में दांव पर होगी।

अगर बीजेपी को फतह मिल गई तो कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ जाएगी।

और कांग्रेस जीती तो समझ लीजिए बीजेपी को सत्ता में लौटने के

लिए छह साल और वेट करना पड़ेगा। यह उपचुनाव इस लिहाज

से भी दोनों पार्टियों के लिए लिटमस टेस्ट होगा कि 2023 के

विस चुनाव में बस्तर में उंट किस करवट बैठेगा। जाहिर है, बस्तर

का जनादेश कभी बंटता नहीं…जिस पार्टी के पक्ष में जाता है,

वो एकतरफा होता है। 2003 से लेकर 2018 तक के बीच

हुए चार विस चुनावों में यही हुआ है। बहरहाल, लोकल एजेंसियों

और सर्वे की रिपोर्ट में सत्ताधारी पार्टी का पलड़ा भारी बताया जा रहा है।

मनोज मंडावी के निधन के महीने भर में चुनाव होना कांग्रेस पार्टी के लिए प्लस रहा।

विपक्ष के नेता भी मान रहे हैं कि सहानुभूति भी एक फैक्टर रहेगा। पार्टी ने

इसे भुनाने मंडावी की पत्नी को चुनाव मैदान मे उतार ही दिया है। मगर यह

भी सही है कि बीजेपी नेता बृजमोहन अग्रवाल ने चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी

लेकर उपचुनाव की रोचकता बढ़ा दी है। बृजमोहन सियासत के चतुर खिलाड़ी हैं।

बीजेपी के सरकार के समय उपचुनाव में बतौर प्रभारी उनकी जीत का औसत

हंड्रेड परसेंट रहा है। मगर अब भूपेश बघेल की सरकार है। बहरहाल, बृजमोहन

के पहल करके प्रभारी बनने से सियासी प्रेक्षक भी हैरान हैं। क्योंकि, जिस चुनाव

को सरकार आसान मानकर खास गंभीरता नहीं दिखा रही, उसमें बृजमोहन कैसे कूद पड़े?

 

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