Niyog Sadhana : जानिए नियोग साधना का अर्थ और महत्व, इस प्रथा का महाभारत काल से भी था गहरा संबंध

Niyog Sadhana : जानिए नियोग साधना का अर्थ और महत्व, इस प्रथा का महाभारत काल से भी था गहरा संबंध

Niyog Sadhana : जानिए नियोग साधना का अर्थ और महत्व, इस प्रथा का महाभारत काल से भी था गहरा संबंध

Niyog Sadhana : जानिए नियोग साधना का अर्थ और महत्व, इस प्रथा का महाभारत काल से भी था गहरा संबंध

Niyog Sadhana : क्या है नियोग प्रथा भारतीय संस्कृति और शास्त्रों में ऐसी कई बातें हैं,

जिनके बारे में समाज का एक बड़ा वर्ग नहीं जानता। हिन्दू समाज में

https://aajkijandhara.com/maharashtra-gondia-news/

एक ऐसी प्रथा है जिसका नाम है नियोग प्रथा। आप इसके बारे में

पौराणिक कथाओं, फिल्मों और ऐतिहासिक ग्रंथों में पढ़ और देख सकते हैं।

बहुत से लोग होंगे, जो इस अभ्यास के बारे में जानते होंगे, लेकिन बहुत

से लोग नहीं जानते होंगे कि नियोग अभ्यास क्या है। दरअसल इस प्रथा

के अनुसार अगर किसी महिला के पति की असमय मृत्यु हो जाती है

या वह बच्चा पैदा नहीं कर पाता है तो वह महिला अपने देवर से

गर्भधारण कर सकती है। आइए अब जानते हैं कि आखिर क्या है ये प्रथा?

नियोग प्रथा क्या है?

मनुस्मृति के अनुसार नियोग साधना में पति द्वारा सन्तान उत्पन्न

न करने पर या पति की अकाल मृत्यु होने पर स्त्री अपने देवर

या पत्नी से गर्भवती हो सकती है। लेकिन इस प्रथा का सबसे

महत्वपूर्ण नियम यह है कि स्त्री संतान प्राप्ति के लिए ऐसा कर

सकती है। उसकी प्रसन्नता के लिए नहीं, साथ ही यह साधना

तभी की जा सकती है जब स्त्री को कोई संतान न हो।

व्यक्ति को समाज में अधिक सम्मान मिलता है

कुछ प्रचलित कथाओं के अनुसार, ‘जब किसी स्त्री के पति

की असमय (शादी के 4-6 साल के भीतर) मृत्यु हो जाती है

और उस व्यक्ति का एक अविवाहित छोटा भाई होता है, तो

उसका कानूनी तौर पर उसकी भाभी से विवाह हो जाता है।

इसे नियोग अभ्यास कहते हैं। जो व्यक्ति इस प्रथा को अपनाता है

उसका समाज में मान-सम्मान और भी बढ़ जाता है।

इस प्रथा का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है।

नियोग प्रणाली महाभारत काल में भी अपनाई गई थी। प्राचीन काल में जब पति सन्तान उत्पन्न करने में असमर्थ होता था या जीवित नहीं रहता था तो वंश चलाने के लिए पत्नी किसी अन्य व्यक्ति से संबंध बना लेती थी। इसका एक उदाहरण महाभारत में मिलता है, जहां गंगा पुत्र भीष्म ने कभी विवाह न करने और ब्रह्मचर्य का पालन करने की प्रतिज्ञा की थी, उनके पिता शांतनु का विवाह मत्स्य सुंदरी सत्यवती से हुआ था। इसमें एक शर्त थी कि सत्यवती का पुत्र ही गद्दी पर बैठेगा।

नियोग प्रथा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम

नियोग का पहला और आवश्यक नियम यह है कि कोई भी महिला केवल संतान प्राप्ति के लिए इस प्रथा का पालन करेगी न कि सुख के लिए। नियोग में शरीर पर घी लगाया जाता है, जिससे पत्नी और नियुक्त पुरुष में कामवासना जागृत न हो। इस साधना का दुरूपयोग नहीं होना चाहिए, इसलिए मनुष्य अपने जीवन काल में केवल 3 बार ही नियोग का पालन कर सकता है। नियुक्त व्यक्ति धर्म पालन के निमित्त ही इस साधना को करेगा। इसका मकसद सिर्फ महिला को संतान प्राप्ति में मदद करना होगा। इस प्रथा से उत्पन्न संतान वैध मानी जाएगी। वह बच्चा कानूनी तौर पर पति और पत्नी का बच्चा होगा न कि नियुक्त व्यक्ति का। साथ ही, भविष्य में नियुक्त पुरुष बच्चे पर अपने अधिकार का दावा नहीं कर सकता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed