विधायक एवं कलेक्टर ने दो लोगों को सौंपा भू-स्वामी हक : मालिकाना हक मिलने से जायसवाल और जैन परिवार में आई खुशहाली

महासमुंद । राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना में से एक नगरीय क्षेत्रों के शासकीय भूमि में अतिक्रामकों को शासकीय भू-खण्ड का भू स्वामी हक में व्यवस्थापन, बंटन, विलेख का वितरण किया जा रहा है। प्रत्येक व्यक्ति का सपना होता है कि उसके पास एक अपना घर हो क्योकि अपना घर तो अपना घर ही होता है जिसमें अपनी यादें, एहसास जुड़े होते है। कई लोग सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर अपनी जरूरत के मुताबिक मकान, दुकान एवं अन्य चीजें बना लिए रहते है। लेकिन उन्हें हर वक्त भय सताता रहता है। लेकिन राज्य शासन ने उनकी चिंता को दूर करने की योजना बनाई। राज्य शासन द्वारा नगरीय क्षेत्रों में 7500 वर्ग फीट तक की शासकीय भूमि का आबंटन तथा अतिक्रमित 7500 वर्ग फीट तक की शासकीय भूमि के व्यवस्थापन का अधिकार जिला कलेक्टर को प्रदान किया गया है। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. रवि मित्तल, अपर कलेक्टर जोगेन्द्र कुमार नायक, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सुनील कुमार चन्द्रवंशी सहित अन्य विभाग के अधिकारी एवं हितग्राहीगण उपस्थित थे।
आज शनिवार को जिला कार्यालय के सभाकक्ष में संक्षिप्त कार्यक्रम आयोजित कर संसदीय सचिव एवं महासमुन्द विधायक विनोद चन्द्राकर तथा कलेक्टर डोमन सिंह ने राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भू-खण्ड का भूमि स्वामी हक में व्यवस्थान, बंटन, विलेख का प्रमाण पत्र दो हितग्राहियों को सौंपा। इनमें महासमुन्द निवासी सुरेन्द्र जायसवाल एवं रविन्द्र जैन शामिल है। सुरेन्द्र जायसवाल ने शासन के नए प्रावधानों का लाभ लेते हुए अपने द्वारा किये अतिक्रमण को नियश्रिीमतीकरण करने के लिए 4,38,679 रुपए एवं रविन्द्र जैन ने 2,19,123 रूपए चालान के माध्यम से जमा कर अपने भूस्वामित्व अधिकार प्राप्त किया है। इसके अलावा जिला मुख्यालय के शासकीय भूमि के अतिक्रामकों श्रीमती आशा दत्ता, कीर्ति मिश्रा, राकेश जैन, धरम भार्गव को भी शीघ्र भूमि स्वामी हक का अभिलेख प्रदाय किया जाएगा।
इस अवसर पर संसदीय सचिव एवं विधायक महासमुन्द विनोद चन्द्राकर ने कहा कि राज्य शासन की यह प्रदेश एवं देश में अनूठी योजना है। सरकार की सोच है कि यदि कोई व्यक्ति नगरीय क्षेत्र में स्थित अतिक्रमित शासकीय भूमि के व्यवस्थापन के समय राज्य शासन से भूमि स्वामी हक में भूमि प्राप्त करना चाहता है तो भूमि आबंटन के समय संबंधित व्यक्ति को निर्धारित गाइड लाइन अनुसार राशि जमा कर अतिक्रमण भूमि के विस्थापन योजना का लाभ निर्धारित कीमत पर उठा सकते है। इसके लिए अन्य लोगों को भी आगे आने की जरूरत है। आज जिन लोगों को यह प्रमाण पत्र दिया जा रहा हैं। वे अन्य लोगों को भी प्रेरित करें ताकि वे लोग भी इस योजना का लाभ अधिक से अधिक उठा सकें।
कलेक्टर डोमन सिंह ने कहा कि राज्य शासन के गाईड लाईन के अनुसार केवल थोड़ा सा शुल्क चुकाकर नागरिक अपने पट्टों पर भूमि स्वामी अधिकार प्राप्त कर सकते हैं। यदि कोई अतिक्रामक है तो वो भी इसके लिए तय की गई नियत राशि चुकाकर भूमि स्वामी हक प्राप्त कर सकते हैं। भूमि स्वामी हक प्राप्त करने से संपत्ति के विक्रय में, बैंक लोन में, बंटवारा करने तथा अन्य तरह की सभी दिक्कत दूर हो जाएगी। इस तरह के अवसर नागरिकों के समक्ष बहुत कम ही मिलते है, जिन्हें उन्हें खोना नहीं चाहिए। जिले के अनेक नागरिकों ने इसके लिए आवेदन किए हैं और उन्हें भूमि स्वामी अधिकार प्रदान किए जा रहें हैं। इन प्रकरणों पर शीघ्रता से कार्रवाई की जा रही है। यह भूमि स्वामी हक प्राप्त करने के लिए यह अच्छा अवसर है इस अवसर का लाभ नागरिकों को उठाना चाहिए। राजस्व अधिकारियों द्वारा भी जिन लोगों ने भूमि स्वामी हक के लिए आवेदन लगाए हैं उनके मामले तय समय में निराकृत किए जा रहें हैं।
इस अवसर पर कलेक्टर डोमन सिंह ने शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना में राजस्व विभाग महासमुन्द के तहसीलदार मूलचंद चोपड़ा, अतिरिक्त तहसीलदार प्रेमू लाल साहू, राजस्व निरीक्षक मनीष वास्तव, संजय सेल्के, पटवारी राकेश थवाईत, खम्मन साहू के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनके द्वारा अतिक्रामकों के घर-घर सर्वेक्षण कर उन्हें इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित करते हुए भू-स्वामी हक का प्रकरण तैयार करने में काफी अच्छा कार्य किया गया है।
सुरेन्द्र जायवसवाल एवं रविन्द्र जैन ने राज्य शासन के इस महत्वाकांक्षी योजना की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश एवं प्रदेश में पहली बार इस तरह की योजना लागू की गई है। जो काफी सरहानीय है। इस योजना का लाभ अधिक से अधिक अतिक्रामकों को उठाना चाहिए। उन्हें जिला प्रशासन एवं राजस्व विभाग के माध्यम से अपने हक का अभिलेख मिलने से हम इस जमीन के वास्तविक स्वामी बन गए। पूर्व में यह जमीन शासकीय होने के कारण हम इस पर अपना वास्तविक मालिकाना हक नहीं जता पा रहें थे। अब इस जमीन का अभिलेख मिलने से हमारी चिन्ता दूर हो गई है।

 

 

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