आजाद के बाद राज्यसभा में कौन होगा कांग्रेस का नया चेहरा

मंजरी चतुर्वेदी
कांग्रेस पिछले कुछ समय से संक्रमण के दौर से गुजर रही है। नेताओं में आपसी मतभेद तो थे ही, अब नेतृत्व की क्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं। बीजेपी के ‘हिंदुत्व’ और ‘राष्ट्रवाद’ पर पार्टी का क्या स्टैंड हो, इस पर भी एक राय नहीं बन पा रही है। इन सबके बीच राज्यसभा में विपक्ष के नेता और पार्टी के सीनियर नेता गुलाम नबी आजाद मंगलवार को रिटायर हो गए। वे भी उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए थे। इन नेताओं को अभी जी-23 के नाम से जाना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि 23 नेताओं ने एक साथ चि_ी लिखी थी। स्वाभाविक रूप से बीजेपी इन जी-23 नेताओं पर नरम है। मंगलवार को राज्यसभा में जिस तरह पीएम मोदी ने गुलाम नबी आजाद की प्रशंसा की, उसके बाद इस तरह की चर्चा को और बल मिला। दो दिन पहले भी सदन में पीएम मोदी ने उन्हें जी-23 का नेता बताकर तारीफ की थी। गुलाम नबी आजाद के बाद राज्यसभा में कांग्रेस का नेता कौन होगा और कांग्रेस के अंदर आने वाले दिनों में समीकरण किस तरह बदल सकते हैं, इसे लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
कौन होगा नया नेता
राज्यसभा में आज भी कांग्रेस बीजेपी के बाद सबसे बड़ी पार्टी है। गुलाम नबी आजाद के बाद राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के लिए कांग्रेस के सीनियर नेता मल्लिकार्जुन खडग़े का नाम सबसे आगे है। कर्नाटक के सीनियर कांग्रेस नेता खडग़े न सिर्फ 16वीं लोकसभा में कांग्रेस का नेतृत्व कर चुके हैं, बल्कि गांधी परिवार के वफादार भी माने जाते हैं। इसके अलावा वे कांग्रेस का एक बड़ा दलित चेहरा भी हैं। उन्हें जब राज्यसभा भेजा गया था, तभी से माना जा रहा था कि आने वाले दिनों में उन्हें राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि इस रेस में दावा उपनेता प्रतिपक्ष आनंद शर्मा का भी था, लेकिन वे न सिर्फ असंतुष्ट गुट जी-23 में शामिल हैं, बल्कि लगातार पार्टी की अहम बैठकों में लीडरशिप पर भी सवाल उठाते रहे हैं। इसके अलावा आनंद शर्मा हाल में कई मौकों पर मोदी सरकार की तारीफ भी कर चुके हैं। ऐसे में उनकी दावेदारी लगभग समाप्त ही मानी जा रही है।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की इस रेस में सीनियर नेता दिग्विजय सिंह और जयराम रमेश भी दावेदार माने जा रहे हैं। जिस तरह से आने वाले समय में राहुल गांधी के कांग्रेस की कमान संभालने की बात कही जा रही है, उसे देखते हुए माना जा रहा है कि सभी अहम पदों पर राहुल गांधी के मन मुताबिक लोगों की टीम तैयार होगी। संगठन में हुए बदलाव हों या लोकसभा की तस्वीर, वहां काफी हद तक टीम ऐसी तैयार हो रही है, जो राहुल गांधी या हाइकमान पर सवालिया निशान न लगा सकें। केसी वेणुगोपाल, अजय माकन, भूपेश बघेल, राजीव सातव, नाना पटोले जैसे चेहरे राहुल की पसंद माने जाते हैं। मगर राज्यसभा में कांग्रेस एक ऐसे चेहरे को आगे बढ़ाना चाहेगी, जो आक्रामक तरीके से पार्टी का पक्ष रखने के साथ ही विपक्ष के नेताओं से सीधा संवाद भी कर सके। जिसकी सबके बीच पैठ भी हो। इस लिहाज से भी खडग़े पार्टी की पसंद हो सकते हैं।
मुस्लिम फेस की मजबूरी
अब गुलाम नबी आजाद भले ही राज्यसभा से रिटायर हो गए हैं, लेकिन पार्टी को अभी एक मुस्लिम चेहरे की सख्त जरूरत है। अहमद पटेल के निधन के बाद अभी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में एक भी मुस्लिम फेस नहीं है। साथ ही कश्मीर में भी पार्टी को आजाद की जरूरत हो सकती है। हालांकि हाल में हुए निकाय चुनाव में आजाद की सुस्ती को लेकर पार्टी नेतृत्व उनसे खफा रहा है। ऐसे में पार्टी आजाद को सक्रिय राजनीति में कायम रखते हुए राज्यसभा का एक और टर्म दे सकती है। चर्चा है कि संभवत: उन्हें केरल से राज्यसभा में भेजा जाएगा। वहां अप्रैल में तीन सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से दो सीटें सत्तारूढ़ एलडीएफ को जाएंगी, पर एक सीट कांग्रेस के खाते में आएगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री व्यालार रवि का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है। कांग्रेस चाहे तो आजाद को यहां से भी भेज सकती है। पार्टी ने केरल के अपने सीनियर नेता वेणुगोपाल को पिछले साल राजस्थान से राज्यसभा भेजा था। ऐसे में वह आजाद को केरल से उम्मीदवारी दे सकती है। इतना ही नहीं, केरल में मुस्लिमों की खासी तादाद है। वहां हिंदू आबादी के बाद 22 फीसदी तादाद मुस्लिमों की है, जो केरल की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं। आजाद को उतारकर कांग्रेस वहां मुस्लिम आबादी को एक अच्छा संकेत दे सकती है। आगामी अप्रैल मई में केरल में असेंबली चुनाव भी होने हैं। हालांकि एक आशंका यह भी जताई जा रही है कि चुनाव के बीच किसी बाहरी को केरल से राज्यसभा भेजना कहीं उलटा न पड़ जाए।
सूत्रों के अनुसार पार्टी में इस बात को लेकर गंभीर मंथन हो रहा है कि मुस्लिम चेहरे के बिना उसे कई जगह नुकसान उठाना पड़ रहा है। हाल के दिनों में ओवैसी जिस तरह से देश में सबसे बड़े मुस्लिम नेता के रूप में उभरे हैं, उसके बाद पार्टी के अंदर इस बात को लेकर मंथन और तेज हुआ है। ओवैसी ने कई मौकों पर यह सवाल किया है कि कांग्रेस में अब मुस्लिम नेताओं की जगह नहीं रही। वे इसी नाम पर मुसलमानों को बीजेपी और कांग्रेस दोनों से दूर रहने की हिदायत दे रहे हैं और उनसे अपने लिए वोट करने को कह रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इसी नैरेटिव को कांउटर करने के लिए कांग्रेस ने पहले के स्टैंड के विपरीत अजमल की पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन किया है। यूपीए सरकार के दौरान सलमान खुर्शीद को पार्टी ने मुस्लिम चेहरे के रूप में प्रमोट करने की कोशिश की थी, लेकिन वे प्रभावी साबित नहीं हुए। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। गुलाम नबी आजाद वहां पार्टी के सबसे बड़े चेहरे हैं। जाहिर है कि भले राज्यसभा में पार्टी नेता के रूप में वे हटे हों, उनकी जरूरत मजबूरीवश ही सही, पार्टी को अभी आगे भी पड़ सकती है।

 

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