राईस मिलरों ने उठाने से किया था इंकार, प्रशासन के कर्मचारी के लापरवाही से समिति में आया सड़ा धान

चंद्र प्रकाश साहू   
सुरजपुर। जिले के सहकारिता विभाग में अनिमियता रुकने का नाम नही ले रहा हैं। फर्जी किसानों के नाम से धान बेचने का सिलसिला जिले में खुलेआम चल रहा है। संग्रहण केंद्र में सड़ा धान जिसे राइस मिलरों द्वारा उठाव किया गया था। जिसे समिति प्रबन्धक और सम्बंधित विभाग के मिली भगत से बिचौलियों द्वारा पुनः धान खरीदी केंद्र में किसान के नाम से सड़ा हुआ धान बेचने का सनसनी खेज मामला सामने आया है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष जिले के तमाम धान खरीदी केंद्रों में धान की खरीदी की गई थी। जिसे आवश्यकता अनुसार राईस मिलरों को कस्टम मिलिंग के लिए भेजा गया था। मार्कफेड द्वारा तो वहीं लाखों किवंटल धान जिले के ग्राम देवनगर व ग्राम बसदेई स्थित लोधीमा में संग्रहण केंद्र बनाकर धान रखी गई थी। जहां लाखों रुपये खर्च करके धान का संग्रहण किया गया था। इस दौरान बारिश का पानी अंदर चले जाने व नमी आ जाने के कारण लगभग 9 करोड़ का धान सड़ गया है। जिसे सरकार ने उठाव के भी आदेश राईस मिलरों को दिया गया था। राईस मिलरों ने शुरुआत दिनों में उठाव से इंकार करते हुए विरोध दर्ज की थी। जिसके बाद उठाये गए धान संचालक मंडल भंग समिति आदिमजाति सेवा सहकारी समिति शिव प्रसाद नगर व उप केंद्र सोनपुर, बंजा में धान सड़ा हुआ धान बिचौलियों के माध्यम से समिति में चला गया है। जबकि इस समिति खरीदारी प्रशासन के कर्मचारी पटवारी व उप पंजीयक के देख रेख में किया जा रहा था। जिसके बाद भी सड़ा हुआ धान समिति में कैसे पहुँचा ये जांच का विषय है।

इसके साथ ही गत दिनों जिले के संयुक्त कलेक्ट्रेड में हुए बैठक में प्रशासन के अधिकारी, राईस मिलर, समिति के कर्मचारी मौजूद रहे जहां राईस मिलरों ने शिवप्रसाद धान खरीदी केंद्र, सोनपुर, जुर बंजा के केंद्र में धान उठाव से इंकार कर दिया था। जब इस सम्बंध में जिले के बैंक सहकारी बैंक के नोडल गिरजा शंकर साहू से बात की गई तो उन्होंने कहा कि बैठक में सड़ा हुआ धान का मुद्दा तो आया था किंतु किस राईस मिलर ने उठाव किया है। इस सम्बंध में कोई कुछ कहने से इंकार कर दिया था। आख़िर सवाल उठ रहा है कि जब राईस मिलरों ने संग्रहण केंद्र धान का उठाव किया था जो सड़ा हुआ धान था तो वापस समिति में कैसे पहुँचा, इसके साथ ही सूत्रों की माने तो बड़ी संख्या में बिचौलियों ने सड़ा हुआ धान समिति में बेचा है। साथ ही अमानक धान की भी बिक्री कर दी गई है। जिसके बाद भी प्रशासम खामोश बैठी रही। इसके साथ ही स्थानीय किसानों ने जिला प्रशासन से शिकायत करके अमानक धान बेचने की शिकायत की थी। जिसके बाद भी प्रशासन ने इस ओर ध्यान देना ऊचित नही समझा गया है।

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