धान खरीद एवं उसकी कस्टम मिलिंग को लेकर विधानसभा में हुई जमकर तकरार

रायपुर, 25 फरवरी। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज समर्थन मूल्य पर धान खरीद,उसकी कस्टम मिलिंग,केन्द्रीय पूल में खरीद तथा 44 हजार मीट्रिक टन धान की कमी को लेकर प्रश्नोत्तरकाल मंम लम्बी तकरार के बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हस्तक्षेप के बाद आधे घंटे की अलग से चर्चा मंजूर कर ली गई।
श्री बघेल ने खाद्य मंत्री अमरजीत भगत के भाजपा सदस्य अजय चन्द्राकर एवं अन्य सदस्यों के पूरक प्रश्नों के दिए जा रहे उत्तर को लेकर चल रही नोकझोक के बीच हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार इस मसले पर कुछ भी नही छिपायेंगी,वह इस मसले पर आधे घंटे की चर्चा के लिए भी तैयार है।उन्होने दिसम्बर 19 में अपनी सरकार बनने के बाद धान खरीद पर और उससे जुड़े मसले का विस्तार से उल्लेख किया।उन्होने कहा कि 2500 रूपए पर धान खरीद के कारण केन्द्र ने केन्द्रीय पूल के लिए चावल लेने से मना कर दिया, जिसके बाद राज्य को राजीव गांधी न्याय योजना शुरू करनी पड़ी।
उन्होने कहा कि बीते खरीद वर्ष में काफी विलम्ब से गत 03 जनवरी को प्रधानमंत्री से उनकी मुलाकात और फिर उनके हस्तक्षेप के बाद अनुमति मिली।पहले सितम्बर तक अनुमति मिल जाती थी।उन्होने कहा कि पहले 60 लाख मीट्रिक टन की अनुमति मिली बाद में उसे घटाकर 24 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया।उन्होने कहा कि इस मसले पर भारत सरकार एवं राज्य सरकार की समझ अलग अलग है।
श्री बघेल ने कहा कि अनाज का और अन्नदाता का सम्मान होना चाहिए।उन्होने पिछली खरीद सीजन के धान को लेकर उठाई आपत्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि लकीर के फकीर मत बनिए। उन्होने मामला उठाए जाने को सही बताते हुए कहा कि इससे अधिकारियों पर दबाव बनता है।उन्होने कहा कि इस मसले पर राजनीति करने की उनकी कोई मंशा नही है,पर दो वर्ष हो गया धान से एथेनाल बनाने का प्लांट लगाने की अनुमति केन्द्र नही दे रहा है।
श्री बघेल ने कहा कि वह इस मसले पर आधे घंटे की चर्चा को भी तैयार है।भाजपा सदस्य श्री चन्द्राकर ने मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप एवं आधे घंटे की चर्चा के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए आंसदी से चर्चा स्वीकार करने का अनुरोध किया जिसे उपाध्यक्ष मनोज मंडावी ने स्वीकार कर लिया।इससे पूर्व श्री भगत के पूरक प्रश्नों के उत्तर में स्वीकार किया कि पिछले खरीद वर्ष 2019-20 में समितियों में खरीदे गए धान में 44 हजार मिट्रिक टन की कमी पाई गई है।
भाजपा सदस्य श्री चन्द्राकर ने एक वर्ष के बाद भारतीय खाद्य निगम(एफसीआई) एवं नागरिक आपूर्ति निगम आपूर्ति निगम(नान) में चावल जमा करने के नियम की जानकारी मांगी और उसे सदन के पटल पर रखने को कहा तो मंत्री ने कहा कि चावल केन्द्र की गाईड लाईन के अनुसार जमा होता है जबकि नान में जमा करने से पूर्व क्वालिटी इंस्पेक्टर जांच करता है।श्री चन्द्राकर एवं अन्य सदस्यों द्वारा एक वर्ष बाद भी चावल को जमा नही किए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी।
मंत्री ने कहा कि खरीद वर्ष 2019-20 में तीन लाख मीट्रिक टन धान संग्रहण केन्द्रो पर है जबकि समिति स्तर पर 44 हजार मीट्रिक टन कम पाया गया है।उन्होने पूरक प्रश्नों में यह भी स्वीकार किया कि केन्द्र से 2019-20 में 28 लाख मीट्रिक टन जमा करने की अनुमति मिली थी लेकिन राज्य सरकार दो लाख कम 26 लाख मीट्रिक टन ही चावल जमा कर सकी।इस पर भाजपा सदस्यों ने सरकार को आड़े हाथो लिया।
नेता प्रतिपक्ष धरम कौशिक एवं अन्य भाजपा सदस्यों ने पूरे मामले की सदन की समिति से जांच करवाने की मांग करते हुए कहा कि राज्य को एक हजार करोड़ रूपए का नुकसान हुआ है।भारी अफरातफरी हुई है।भाजपा सदस्य श्री चन्द्राकर ने कहा कि मंत्री इस बारे में बताने की स्थिति में नही है।परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि मंत्री आपके कहे अनुसार उत्तर नही देंगे।आप उत्तर पर बहस नही कर सकते।अगर उत्तर में असत्यता हैं तो उसके लिए नियम प्रक्रिया है,उसके तहत कार्रवाई कर सकते है।

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