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Sunday, September 25, 2022

Pakad है सबसे धाकड़, नहीं होता पतझड़ काल

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राजकुमार मल

सदाबहार ‘Pakad’, जिसका पतझड़ काल सबसे कम

भाटापारा- Pakad पर्यावरण प्रेमियों के लिए जरूरी खबर। पौधरोपण के लिए पहली बार ऐसा पौधा मिलने जा रहा है,

जिसका पतझड़ काल सबसे छोटा होता है।

इसकी वजह से इसे सर्वाधिक पत्तियां और सर्वाधिक आक्सीजन देने वाले वृक्ष के रूप में पहचान मिल चुकी है।

वट वृक्ष परिवार के इस सदस्य को ‘पाकड़’ के नाम से जाना जाता है।

पर्यावरण को लेकर जैसी स्थितियां बन रहीं हैं, अनुपात में हरियाली को लेकर चलती गतिविधियां नाकाफी ही मानी जा रही है।

पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के बीच अच्छी खबर यह है

वट वृक्ष परिवार का सदस्य ‘Pakad’ हमारी सहायता के लिए आ चुका है।

देखना यह है कि आसान पहुंच के बाद Pakad को स्वीकार्यता कितनी मिलती है।

लेकिन इतना तो तय है कि जिस तरह अपने गुणों के दम पर इसने वानिकी वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है,

वह आगे जाकर पर्यावरण प्रेमियों को भी अपनी और आकर्षित करेगा।

Pakad इसलिए है धाकड़

छत्तीसगढ़ की जलवायु के लिए मुफीद पाकड़ को इसलिए जुझारू या धाकड़ कहा जाता है

क्योंकि इसमें सर्वाधिक संख्या में पत्तियां लगती है। इसकी वजह से यह बेहद घना होता है।

अपने इसी गुण की वजह से इसे सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाला वृक्ष माना जा रहा है।

मालूम हो कि इसके पहले तक पीपल और वट वृक्ष ही इस श्रेणी में हैं।

होती हैं सर्वाधिक पत्तियां, देता है सबसे ज्यादा ऑक्सीजन

पतझड़ के मौसम में अन्य दूसरे पेड़ों की तरह पाकड़, पत्तियां विहिन नही होता।

पुरानी पत्तियों का झड़ना और नई पत्तियों का निकलना,

दोनों प्रक्रिया समान रूप से चलने की वजह से इसे इस मौसम से दूर माना गया है।

सतत प्रक्रिया की वजह से Pakad ही एकमात्र ऐसा पेड़ है, जो गर्मी के मौसम में भी घनी और ठंडी छांव देता है।

नमी में जल्द तैयार

पाकड़ के लिए वैसे तो छत्तीसगढ़ की की जलवायु बेहद मुफीद मानी गई है

लेकिन मानक मात्रा में नमी मिलने पर यह मिट्टी की हर प्रकृति में तैयार हो जाता है।

हल्की बालूई व चिकनी मिट्टी बेहतर मानी गई है। उपलब्धता होने की स्थिति में पौधों का रोपण किया जा सकता है।

विपरीत स्थितियों में शाखाओं से नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं। कोमल अवस्था में इसकी पत्तियों से सब्जी भी बनाई जा सकती है।

छाल में मिले यह गुण

Pakad की छाल पर जब रिसर्च हुए तब इसमें कई तरह की बीमारियों पर नियंत्रण के गुण मिले।

जिसके अनुसार छाल का काढ़ा पीने से रक्त स्राव की दिक्कत दूर की जा सकती है।

मधुमेह पर पूरा नियंत्रण रखा जा सकता है। छाल को उबाल कर उसके पानी से नहाने पर पसीने की दुर्गंध से छुटकारा मिलता है।

पाउडर बनाकर सेवन करने से त्वचा की जलन कम की जा सकती है, तो पित्त और वायु रोग भी कम होते हैं।

प्रकाश संश्लेषण हमेशा

पाकड़ जुझारू पेड़ होता है। इसकी शाखा भी पनप जाती हैं। इसका पेड़ घना होने के बाद शीतल छाया देता है।

अधिक उम्र तक जीवित रहने, अधिक पत्तियों और सबसे छोटा पतझड़ काल होने के कारण Pakad में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया हमेशा होती है। इससे ऑक्सीजन का उत्सर्जन अधिक होता है।

– अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट, फॉरेस्ट्री, टीसीबी कॉलेज ऑफ एग्री एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

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