भागवत कथा के दौरान कृष्ण जन्म पर जयकारों से गूंजा पंडाल

 संत वर्षा नागर ने भगवान के जन्म प्रसंग को संजीदगी के साथ सुनाया
महासमुंद। ग्राम केशवा में आयोजित मद् भागवत कथा के दौरान गुरूवार को भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान पंडाल जयकारों से गूंज उठा। उज्जैन की अंतर्राष्ट्रीय संत देवी वर्षा नागर ने कहा कि कहा कि जब धरती पर चारों ओर अत्याचार, अनाचार का साम्राज्य फैल गया तब भगवान कृष्ण ने देवकी के आठवें गर्भ के रूप में जन्म लेकर कंस का संहार किया।
गुरूवार को भागवत कथा के दौरान संत देवी वर्षा नागर ने कहा कि कहा कि भगवान कृष्ण ने अपने भक्तों का उद्धार व पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। संत देवी वर्षा नागर ने भगवान कृष्ण के जन्म का प्रसंग व उनके जन्म लेने के रहस्यों को संजीदगी के साथ सुनाया। ष्ण जन्मभूमि स्थित कंस के कारागार में कृष्ण का जन्म हुआ था। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए। फिर पिता वासुदेव ने यमुना बालकृष्ण के पैर छूना चाह रही थी। इसी प्रयास में नदी का पानी ऊपर उठने लगा। इसके बाद बालकृष्ण ने अपना पैर टोकरी से निकालकर बाहर रखा। यमुना उनका चरण छूकर नीचे आ गई। इसके बाद आगे रास्ता बनता चला गया। बारिश से बचाने के लिए शेषनाग फन फैलाकर उनके पीछे-पीछे चल रहे थे। इस तरह कृष्ण गोकूल तक पहुंचे। जहां बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन मौजूद थे।

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