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Sunday, September 25, 2022

फसल बुआई के पहले छत्तीसगढ़ के गांवों में प्रचलित रही है ‘‘रोका-छेका’’ की प्रथा

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roka cheka chhattisgarh 

KHOMAN SAHU, RAIPUR। मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ के गांवों में आगामी फसल की बुवाई से पहले फसलों को खुले में चरने वाले पशुओं से बचाने के लिए इस वर्ष भी ”रोका-छेका” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा.

प्रदेश के जिला पंचायतों के समस्त कलेक्टरों और मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को छत्तीसगढ़ के रोका-छेका प्रथा के अनुसार गौठानों में पशुओं के प्रबंधन और रख-रखाव की समुचित व्यवस्था करने हेतु प्रोत्साहित किया जाये, जिससे पशुपालकों और किसानों को अपने पशुओं को उनके घरों में बांधकर 20 जून तक ग्राम स्तर पर गांवों में पहाड़िया (चरवाहा) की व्यवस्था के संबंध में बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं.

(roka cheka chhattisgarh) उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel की पहल पर गांवों में “रोका-छेका” की प्रथा को फिर से पुनर्जीवित किया गया है. इस वर्ष रोका-छेका कार्यक्रम का दूसरा वर्ष है.

कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने जिला पंचायत के कलेक्टरों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को रोका-छेका कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर प्राथमिकता के आधार पर सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.

छत्तीसगढ़ में अगली फसल की बुवाई के कार्य से पहले खुले में चरने वाले पशुओं के नियंत्रण के लिए “रोका-छेका” की प्रथा प्रचलित है, जिसमें पशुपालकों और किसानों को फसल की बुवाई को बढ़ावा देने और फसल को चराई से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए किया जाता है.

ग्रामीण पशुओं को बांधकर रखने या पाटिया (चरवाहा) आदि की व्यवस्था करने का काम करते हैं.

इस प्रयास से किसान न सिर्फ बुवाई का काम तेजी से पूरा कर पा रहे हैं, जहां दूसरी फसल लेने के लिए भी प्रेरित हो रहे हैं.

रोका-छेका प्रथा के तहत

(roka cheka chhattisgarh) कृषि उत्पादन आयुक्त द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्राम स्तर पर ग्राम स्तर पर 20 जून तक ग्राम सरपंच, पंच, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की बैठक आयोजित की जाये, ताकि रोका के अनुसार सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा सकें. जिसमें फसल को पशुओं के नियंत्रण से बचाने का निर्णय गांव के सरपंच, पंच, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को लेना चाहिए.

फसल को चरने से बचाने के लिए प्रत्येक गौठान गांव में पशुओं को नियमित रूप से गौठान लाने के संबंध में मुनादी बनाई जाए.

रोका-छेका प्रथा के तहत गौठानों में पशुओं के प्रबंधन और रख-रखाव की समुचित व्यवस्था के लिए गौठान प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की जाए.

ऐसे मामलों में, जो सक्रिय रूप से परिलक्षित नहीं हो रहे हैं, आवश्यकता के अनुसार जिले के प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से समिति में संशोधन करके सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए.

इसके साथ ही पहाड़िया (चरवाहा) की व्यवस्था द्वारा गौठानों में पशुओं की व्यवस्था सुनिश्चित करें. गौठानों में पशु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाये तथा वर्षा ऋतु में गौठानों में पशुओं की सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किये जाये. वर्षा के कारण जलजमाव की समस्या को दूर करने के लिए गौठानों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए और गौठान परिसर में पशुओं के बैठने के लिए खाली जगह की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए.

(roka cheka chhattisgarh) कृषि उत्पादन आयुक्त ने गोधन न्याय योजना के तहत उत्पादित वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट को बारिश, बाढ़ से बचाने के लिए गोधन न्याय योजना के तहत जैविक खेती और वर्मी कम्पोस्ट के महत्व को व्यापक प्रचार देने के लिए व्यवस्था की है. किसानों को खेती में सुपर कम्पोस्ट के उपयोग के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए गए हैं.

कलेक्टरों और मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को गौठान में पर्याप्त चारा, पारा आदि की व्यवस्था करने, ग्रीष्मकालीन धान की फसल दान करने के लिए किसानों को प्रेरित करने, 30 जुलाई से पहले सभी निर्मित गौठानों में चारागाह स्थापित करने और चारा उत्पादन करने के निर्देश दिये गये हैं. कलेक्टरों को स्थानीय स्तर पर रोका-छेका कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित कर ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया है.

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